आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P2-0184 · भाग 2

ज्ञान होने तक तो ये घाव बार-बार हरे हो जाते हैं; याद आते ही मन घृणा से भर जाता है और न चाहते हुए भी उनके लिए बद्दुआएं निकल जाती हैं। फिर डर लगता है कि इस द्वेष से मैंने फिर कर्म-बंधन बांध लिया। अगर ज्ञान से पहले शरीर छूट गया, तो क्या इस द्वेष के कारण मैं फिर उन्हीं के इर्द-गिर्द, उनके परिवार में पैदा हो जाऊंगा — वही चक्र, जिसे मैं तोड़ना चाहता हूं?

हां, अगर आत्मज्ञान नहीं हुआ, तो इसका मतलब लेना-देना बाकी ही रहता है; तो आप उनके इर्द-गिर्द ही आओगे। लेन-देन जिसके साथ रहेगा, आप उसी के पास आओगे, वे आपके पास आएंगे।

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वीडियो: आखिर कब तक ये याद रहेगा ? #योगी · 2026-01-16