प्रश्नोत्तर P21-0074 · भाग 21
गुरु जी, कर्मों का विधान क्या है? शास्त्र तीन कर्म बताते हैं — क्रियमाण, प्रारब्ध और संचित।
मनुष्य जब कुछ भी करेगा तो कर्म तो होगा ही। कर्म अच्छा है तो भी बंधन है, बुरा है तो भी बंधन। तो ठीक में करो — ना अच्छा, ना बुरा; जरूरत में। निष्काम कर्म बंधन नहीं। योग्यता से ज्यादा करने में बंधन है, लेकिन योग्यता में करने में बंधन नहीं — जितनी आपकी सामर्थ्य है उतना करने में राग-द्वेष नहीं, अच्छा-बुरा नहीं, सिर्फ कर्म है, कर्ता का भाव भी नहीं। कर्ता का भाव तब होता है जब सामने वाले को आप आश्वासन देते हो, झूठ बोलते हो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग 20 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-20