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प्रश्नोत्तर P3-0005 · भाग 3

वैराग और वैराग्य में क्या अंतर है? शास्त्र कब समझ में आएंगे?

वैराग जगा मतलब समझ में आ गया — कुछ है नहीं, कहां परेशान हूं, कैसी जिंदगी: पैदा हो, कमाओ, शादी करो, बच्चे पैदा करो, मर जाओ; कीड़े-मकोड़ों की तरह नहीं मरना। ये वैराग है। तब क्या? इससे निकलना है — निकल के कहां? इससे निकलना है; इसको कहते हैं वैराग्य। ‘ये वाली जिंदगी मुझे अब नहीं चाहिए’ — अभी समझ में आई; नहीं चाहिए की बात नहीं, समझ में आ गया कि जो जिंदगी जी रहा हूं अब नहीं चाहिए — सिर्फ समझा है; इसे वैराग बोलेंगे। फिर अगला — कैसे चाहिए — ये वैराग्य। सारा खेल राग और द्वेष में है। वैराग से वैराग्य जगेगा तब शास्त्रों में जाओगे। वैराग-वैराग्य जब जगेगा तब शास्त्र समझ में आने लगेंगे, इस मार्ग वाले लोग समझ में आने लगेंगे। अगर नहीं जगा तो चार वेद, अठारह पुराण, छह शास्त्र, सारे महापुरुषों की वाणी सुना दो — कुछ नहीं होगा, क्योंकि जगह ही नहीं। चोट लगी ही नहीं तो पूरी दुनिया की दवा किस काम की?

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वीडियो: अपूर्ण से पूर्णता की तरफ कैसे जाएं #योगी · 2026-01-10