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प्रश्नोत्तर P3-0093 · भाग 3

(उसी साधिका का प्रश्न) गर्दन कटते समय मुझे जो डर लगा, वह कहां से था? मुझे लगता है इस जन्म में तो कोई विकार हुआ नहीं, तो सूक्ष्म रूप में विकार कब हुआ?

विकार की बात ही छोड़ो; चलो विकार भी कुछ नहीं है, तो गर्दन कटने पर डर क्यों? अब यह ढूंढना है कि डर के पीछे का रीजन क्या है, कारण क्या है। क्या मेरी जीने की इच्छा? तो जीने की इच्छा क्यों? डर है तो कुछ तो पॉइंट है; डर ऐसे ही नहीं होता। इस अंग में प्राण है तभी तक दर्द है। अगर उंगली कटकर अलग हो जाए और आपके सामने उसके टुकड़े-टुकड़े करे, तो 1% भी दर्द नहीं होगा। जैसे यह उंगली जुड़ी है तभी तक इसमें दर्द है। तो अगर आपको डर हुआ, इसका मतलब आप कहीं न कहीं से जुड़े हो। अब देखिए कहां से जुड़ाव है, कहां से मोह है — यह आपको पकड़ना है। घटना गई, वे विष्णु गए, चक्र गया, गर्दन कटा, जुड़ गया; पर उस समय आपके लिए प्रत्यक्ष था। जिसको काम करना था, काम किया और गया। अब इस पॉइंट पर देखना है — मैं डरी क्यों? गर्दन कटा मतलब सब कुछ खत्म; जब सब कुछ खत्म हो रहा था तो मैं डरी क्यों? इसका मतलब कहीं न कहीं कुछ था। कौन सा ऐसा माल छुपाया है जिसमें आसक्ति है — रिश्तों का माल है, वैभव का माल है, कहीं साइन करके नहीं आई हो — क्या बात थी, यह आपको ढूंढना है। इसमें कोई आपकी मदद नहीं करेगा, क्योंकि आपने कहां-कहां गठरियां बांधी हैं यह आप ही को पता है। डर ने रोक लिया ना। अगर मैं जंगल में फंस गया तो दो ही डर हो सकते हैं — या तो मेरे पास माल है, कोई छीन लेगा; या प्राण का डर। तो देखो दो में से क्या है — रिश्ते का डर, या वैभव को सही जगह नहीं दे पाई उसका डर, या किसी को कोई वैभव दी है जो किसी को मालूम नहीं। सब कुछ खत्म करने को तो मैं तैयार थी, तो जब खत्म हो रहा था तो डरी क्यों? कहीं मोह था, आसक्ति थी, बंधन था जो हमने बांधकर रखा है। 'मैं खत्म हो जाऊंगी' उसका डर क्यों? इसका मतलब कोई और है हमारे अलावा जिसे मैं चाहती हूं। अगर ऐसा कुछ नहीं है तो डर भी नहीं होना चाहिए। खत्म ही तो होना है। अब इस पर चिंतन करना है कि वह डर कहां से आया, इस पर काम करना है और वहां से निकालना पड़ेगा।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 14 जून 2026 #योगी · 2026-06-14