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प्रश्नोत्तर P3-0101 · भाग 3

(उसी प्रसंग में) दूसरे का बालक संन्यासी हो तो कहते हैं सात पीढ़ी तार दी, अपना हो तो कहते हैं बिगड़ गया। गुरु जी, क्या संसार में भी अच्छे और अध्यात्म में भी अच्छे, आध्यात्मिक मां-बाप मिलना बहुत कम है?

दूसरे का कोई संन्यासी हो गया तो बोले बेटा तुमने सात पीढ़ी तार दीं। मैं कहता हूं — माता जी, तुम्हारे बेटों की शादी हुई कि नहीं? उनका भी चलो लाइन में लगाओ। बोले नहीं बेटा, उनकी शादी करनी है। तो झूठी वाहवाही मत करना — अपने बेटे के लिए शादी, और मुझे कह दिया सात पीढ़ी तार दीं। कितने झूठे लोग हैं — दूसरे का बालक संन्यासी होगा तो कहेंगे सात पीढ़ी तार दीं, और खुद का होगा तो कहेंगे बिगाड़ दिया। मैं लोगों को डांट देता हूं — अपने बेटों को भी बनाओ। महाराष्ट्र में बोलते हैं, शिवाजी दूसरे के घर में हों, अपने घर में नहीं। दूसरे का बालक हुआ तो पांव छूते हो, आशीर्वाद मांगते हो; अपना बालक हुआ तब तो और खुश होना चाहिए। ऐसे मां-बाप बहुत कम हैं, लेकिन हैं — रेयर, बहुत-बहुत कम, लीस्ट से लीस्ट; नहीं तो सब वही — धन चाहिए, यह चाहिए, वह चाहिए। जिनके मात-पिता, भाई-बहन, पूरा परिवार आध्यात्मिक है — बढ़िया है, सौभाग्यशाली हो।

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