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प्रश्नोत्तर P3-0105 · भाग 3

एक साधक (एक महीने से आश्रम में): पहले बिजनेस-जॉब की छोटी-छोटी बातों में बहुत व्यस्त रहता, बहुत सोचता था; यहां आकर विचार शांत हो गए, अंदर पवित्रता का एहसास हो रहा है। बेईमानी आदि का खाने-पीने पर कितना असर पड़ता है? आपने तीन गुण बताए — वे कर्म से होते हैं या खाने से?

इस शरीर में तीन गुण हैं — सात्विक, तामसी, राजसी — ये शरीर के गुण हैं। कौन सा गुण अपनाओ, इसके मालिक आप हो। कर्म के बाद ही तो भोजन मिलता है; भोजन ऐसे फ्री में नहीं मिलता — भिखारी बनना पड़ता है, फिर आखिरी में कोई भोजन ऐसे ही दे दे। कोई भोजन देगा तो कुछ समझेगा तभी देगा। जानवर को जानवर समझकर भोजन देगा, उसे पता है मैं किसको भोजन दे रहा हूं; ऐसे ही आपको भी पता करेगा कि मैं किसको भोजन दे रहा हूं। एक ही घर में सब खा रहे हैं, लेकिन खिलाने वाले का भाव सबके लिए अलग-अलग — किसी के लिए गर्म, किसी के लिए ठंडा। भोजन आपके कर्म से मिलता है, ऐसे सीधा नहीं मिलेगा। अब आप देख लो उस भोजन के लिए आपने काम किया है या नहीं। साधक हो, साधना कर रहे हो, तो तुम्हारा पूरी तरह अधिकार है।

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वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01