आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P3-0122 · भाग 3

(लाइव) गुरु जी, यह मार्ग तो बहुत पीड़ादायक है, सबकी हिम्मत नहीं होती इस पर चलने की। मैं भी सत्य को खोजना चाहता हूं, लेकिन जब मैं अध्यात्म की बात करता हूं तो पूरा परिवार और समाज मेरे विरुद्ध खड़ा हो जाता है।

मेरी समझ से संसार में सबसे पीड़ादायक अगर कुछ है तो बेईमानी का मार्ग है, और सबसे सुकून देता है ईमानदारी का मार्ग — क्योंकि उसमें जहां भी होते हो, तुम होते हो; और बेईमानी में तुम हिमालय में भी चले जाओ, तुम्हारे साथ भीड़ है। जितनी भी घुटन, अशांति, तकलीफ है, बेईमानी में है। यह मार्ग तो एकदम फूलों की सेज है। ओंकारेश्वर में एक व्यक्ति जनवरी के महीने में शाम को नहाकर शिवलिंग के सामने कांप भी रहा है, सो भी रहा है, देखते-देखते सो जा रहा है, जग जा रहा है, रात बीत जा रही है ठंड में। उस व्यक्ति की योग्यता भी है कि वह चद्दर-कंबल खरीद सकता है, लेकिन उसे कांपना देखना है — कांप कौन रहा है। इस एरिया में जब मैं घूम रहा था तो ठंड में ही पड़ा रहता था, काया को जान रहा था, रात भर कई जगह बदलता था। 2019 से नर्मदा तट पर हूं; उसके पहले भारत, नेपाल, कश्मीर भ्रमण कर रहा था। मैंने देखा कि जहां अपने आप में कुछ सुकून है — कुछ तो है आप में, लेकिन वह 'है' को छोड़कर पता चलेगा। तो यह मार्ग — इसके सामने फूलों की सेज भी कम है, यह मेरा अनुभव है। मैंने अपना एक वीडियो देखा — अमरकंटक में एक व्यक्ति खड़ा है, जेब में हाथ डाले, शौचालय के सामने, चिथड़े वस्त्र — उसे कुछ नहीं चाहिए। आज के समय में भिखारी भी वैसे कपड़े नहीं पहनेगा, और वह अपने आप में खुश है — यह कोई मामूली बात है? दो मिनट के वीडियो में उस व्यक्ति ने सब कुछ कह दिया। इस मार्ग की तुलना मैं संसार में किसी से कर नहीं सकता — ऐसी कोई वस्तु ही नहीं जिससे तुलना करूं।

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वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01