प्रश्नोत्तर P4-0047 · भाग 4
(लाइव) गुरु जी प्रणाम। घर पर स्वतः ही मुंह से ‘मात नर्मदे हर’ निकल रहा है; घर वाले मुंह की तरफ देखते हैं। गुरु जी, यह ‘मात नर्मदे हर’ क्या है?
मात नर्मदे हर — मां नर्मदा को मां का स्वरूप माना जाता है; नर के मद को हरने वाली मां नर्मदा। लोग (उनकी) परिक्रमा करते हैं; यहां आके तप करते हैं — यह तपोभूमि है। समाज में जहां भी लोगों ने तप किया है, उनके नाम से तपोभूमि है। यहां किसी इष्ट की जरूरत नहीं होती है; यहां पे आप मेरा-कर्ता से मुक्त होने के लिए तपस्या कर सकते हो। दुनिया में कहीं भी जाओ, तो वहां पर पहले भोजन और रहने की व्यवस्था करो, फिर भजन करो; यहां पर आप (सीधे) अपने कल्याण के लिए काम करो — यहां नर्मदा तट पर व्यवस्था हो जाती है। यह तपोभूमि है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01