प्रश्नोत्तर P4-0049 · भाग 4
(कुटिया में साधक) मेरा पहले वाला प्रश्न अधूरा था — जब आदमी निर्विचार-निर्विकार अवस्था में (देह छोड़कर) जाता है, तो आत्मा की बात नहीं, उसकी जो सूक्ष्म बॉडी है, वो फिर कहां होल्ड होती है? कहीं ना कहीं तो जाती होगी; अगर होल्ड नहीं होती तो फिर उसे नया जन्म तो लेना ही पड़ेगा? जैसे कहते हैं कि वह परमात्मा के पास जाती है।
भाई, जब ये (शरीर) छोड़ेंगे, तभी पता चलेगा ना। जैसे अभी मिले हो, तो मैं जब ये शरीर छोड़ूंगा, फिर मुझे मिलना, तो मैं बता दूंगा। पहले ये शरीर छोड़ा जाए, तब ना। मैं कैसे बता दूं? ऐसे कल्पना की बात कैसे कर दूं? मुझे (शरीर) छोड़ने के बाद मिलना; मैं जहां रहूं, वहां आ जाना, जैसे अभी आए हो — तब मैं बताऊंगा कि देखो यार, छोड़ने के बाद यहां है; तभी बताऊंगा ना।
देखो भैया, हम आत्मा-परमात्मा की बात नहीं करते। मैं सीधी बात बता दूं — मैं भी आपकी तरह उस दुनिया में था; मैंने अपने आप को उस दुनिया से हटाया, और मैं एकदम खुश और प्रसन्न हूं, अपने आनंद में रहता हूं। और अगर आपको ऐसा चाहिए, तो फिर आपको वहां से हटना है, तो हटने का मार्ग मेरे पास है। आप पूछो, लेकिन आप पूछोगे अपने तरीके से, और मैं जवाब दूंगा जितना मैंने समझा है, उतना ही दूंगा ना, क्योंकि प्रत्यक्ष तो प्रत्यक्ष है। तो मैं वहां से निकला और मैं यहां हूं, और आप वहां से निकलना चाहते हो, और मैं निकल पाया हूं, तो मैं भी आपको निकलने का मार्ग बता दूंगा — बस, बात खत्म हो गई। अब वो परमात्मा जाने, आत्मा जाने।
(सूक्ष्म बॉडी होती है —) सिद्ध कैसे करोगे? (किताबों में) पढ़ा है ना — परमात्मा के बारे में भी कहीं ना कहीं पढ़ा होगा, (तो) परमात्मा को (भी) कैसे ना बोल दिए?
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01