प्रश्नोत्तर P4-0066 · भाग 4
(कुटिया में साधक) हम जो ऑक्सीजन लेते हैं, वह किस तरह से पैदा हुआ? हम सोच रहे थे — बीज से वृक्ष, वृक्ष से बीज — बीज कहां से आया, वृक्ष कहां से आया?
अब ये तो पैदा करने वाला बताएगा; अभी तो बायोलॉजी के स्टूडेंट वगैरह बता देंगे, तो आप जाके बायोलॉजी पढ़ लेना — ऑक्सीजन, H2O, (वह) कहां से — आखिरी में जाके (एक जगह) खड़े हो जाओगे। इसका कोई मतलब नहीं है; आप निकल जाओ, इसके लिए काम करो। बीज से वृक्ष, वृक्ष से बीज — यही घूम रहा है, इसे कभी नहीं जाना जा सकता। बस एक काम करो — इससे निकलो, क्योंकि इसके आगे कुछ है ही नहीं। तो आप बहुत करोगे — पानी कहां से, ऑक्सीजन क्या — जाते-जाते तुम एक जगह खड़े हो जाओगे; तो एक काम करो, यहीं खड़े हो जाओ। क्योंकि आप 20 साल बाद (भी) कहीं खड़े ही होने वाले हो, और प्रश्नचिन्ह ही रहेगा कि ये क्या है, कैसे बना — ये अभी भी है और आखिरी तक रहेगा। आप शुरुआत जहां से किए, 100 साल बाद आप अपने आप को वहीं पाए, तो मतलब क्या है? और मैं कह रहा हूं — जान भी लोगे कि कैसे बना, तो उससे क्या होगा? फाइनली आप पहुंच भी गए, (तो) कल्पना ही तो (है); क्या करोगे?
जो इसी क्षण, इसी समय है — उसको छोड़कर अपने आप में स्थिर हो जाओ, तो कोई बात है। सारे विचारों को छोड़कर, ईमानदारी-सत्कर्म अपनाकर, सत्संग सुनते हुए, निकल लो; बस अपना कल्याण कर लो। यह क्या है, उसका जवाब कभी नहीं मिल पाएगा। क्यों नहीं मिल पाएगा? इसका कारण है — क्योंकि जिसके बारे में पूछ रहे हो, वो प्रतिपल बदल रहा है, इसलिए नहीं मिल पाएगा। जो स्थिर है, वो मिल जाता है। स्थिर कौन है? पूछने वाला। जिसके बारे में पूछ रहे हो, वो (स्थिर) नहीं है; पूछने वाला स्थिर है। तो पूछने वाले तक पहुंच जाओ, बस बात खत्म है। अब उसके लिए उसे (जिसके बारे में पूछ रहे हो) छोड़ना पड़ेगा, बस।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01