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प्रश्नोत्तर P4-0071 · भाग 4

(लाइव) गुरु जी, आपके अनुसार यदि कृष्ण के माता-पिता को उनका कर्म फल कंस के द्वारा मिला, तो फिर कंस को (उसका) कर्म फल क्यों मिलेगा?

उसमें कर्म फल आएगा इसलिए कि हमारे पास समझ होती है। एक होता है कि जैसे हम गाड़ी चलाते हैं, हम जा रहे हैं, एक्सीडेंट हो गया। एक होता है हम जान के किए। तो जान के करने वाला, समझ के करने वाला कर्म का बंधन बंधा, और ऐसे ही हो गया — वो कर्म बंधन नहीं बचेगा। तो कंस ने जानबूझकर किया था, पूरी समझ के साथ किया था। वो एक समझ वाला व्यक्ति था। वो कोई अबोध नहीं था, कोई पागल नहीं था, कोई मंदबुद्धि नहीं था। वो एक सम्राट था, राजा था और वो एक राज्य को चलाता था। उसके पास समझ थी अच्छे-बुरे की। तो एक घटना तो बाद में घटी। उस घटना को टाल भी सकता था। कोई भी व्यक्ति — अगर उसे आकाशवाणी हुई, चाहे जैसे भी बातें हैं — तो अगर हमारे साथ कुछ अपराधी का व्यवहार किया जाता है तो हमारे द्वारा कुछ ऐसे कर्म किए गए होंगे। तो उसके बाद भी उसने सिर्फ अपनी मौत को रोकने के लिए अनेक बच्चों को मारा, अपने क्षेत्र में। फिर भी कृष्ण भगवान जब मारने आते हैं तो भी मारने से पहले समझाते हैं कि अभी भी अगर तू सुधरना चाहता है तो हम तुम्हें छोड़ देते हैं। लेकिन उसने कह दिया — नहीं, हम सुधरना नहीं चाहते। तो कहीं ना कहीं वो कर्म के बंधन में बंध गया। और ये (कृष्ण के माता-पिता) अपना भोग करके आगे निकल गए, क्योंकि इन्होंने कभी विरोध नहीं किया। अब ऐसा नहीं कि हमारे साथ कोई अन्याय करे तो हम उसका विरोध ना करें। गलत तरीके से हमें नहीं करना चाहिए। एक बेईमान व्यक्ति गलत-सही दोनों तरीके से अपनी जीत करवाता है, और ईमानदार व्यक्ति उचित तरीके से जवाब देता है। तो हमें उचित तरीके से अपना बचाव रखना चाहिए, बचाव करना भी चाहिए।

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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25