प्रश्नोत्तर P4-0075 · भाग 4
(वही सन्यासी महाराज जी) भेष से एक बेनिफिट तो मिलता है, लेकिन आज के दौर में संतों से लोग बहुत कम प्रेम करते हैं — ट्रेनों में मां-बहन-बेटी पास नहीं बैठती, क्योंकि भेष इतना बदनाम हो चुका है। इस पर आप क्या कहेंगे?
इस दुनिया में मैं आपको बताऊं — यह भेष कोई बदनाम-वदनाम नहीं हुआ है। बाप बेटी के साथ रेप कर दे रहा है। एक बताओ, कौन सा समूह बचा है? कोई ऐसा डिपार्टमेंट बता दो कि वो पूरी तरह समूह बच गया हो — आईएएस, एसडीएम, कलेक्टर, राजा, रंक, वकील, जज, प्राइम मिनिस्टर — आप एक नाम बता दो कि एक समूह का (हर) व्यक्ति बचा हो। हमें मतलब नहीं है। मुझे यह देखना है कि मैं क्या कर रहा हूं — बस, खत्म बात। कोई समूह बचा नहीं है — पुजारी से लेके, पंडा से लेके, साधु से लेके, सन्यासी से लेके, शिक्षक से लेके — कोई समूह नहीं बचा है। तो हम समूह पे ना जाके व्यक्ति-विशेष को पकड़ना चाहिए। जिसने जैसा किया उसको सजा होगी; कानून देगा, संविधान देगा। लेकिन एक बाप ने अगर बेटी का रेप किया तो सारे बाप पे थोड़ी तुम उंगली उठा सकते हो? एक भगवा वाला अगर गलत किया तो सारे पे उंगली नहीं उठाना चाहिए। अगर उसने किया तो कानून उसे दंड देगा। तो (भेष) बदनाम नहीं है। मैं तो घूमा हूं ना — आप अभी अपने साथ चलिए, आपको लोग प्रणाम करेंगे। बदनाम नहीं है, ऐसा ना बोलिए। आप देखिए कि आप वो काम करते हो कि नहीं, वो देखना है। बदनाम लोग हो जाएंगे; कपड़े कभी बदनाम नहीं होते, क्योंकि उस कपड़े के पीछे त्याग है।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25