प्रश्नोत्तर P4-0094 · भाग 4
(लाइव) प्रणाम गुरु जी। क्या कोई परम सत्ता है जिससे हम परेशानी में होने पर मदद मांग सकें, या हमारे अलावा कोई नहीं है? (और फिर —) तो क्या केवल मैं ही सत्य हूं, या मेरे साथ जो लोग दिख रहे हैं वह भी सत्य हैं?
आपके अलावा भिन्न कितने लोग दिख रहे हैं? और कोई आपसे मजबूत भी हैं, कमजोर भी हैं — दोनों चीज हैं। आपसे भिन्न कितने लोग यहीं दिख रहे हैं?
(केवल मैं ही सत्य हूं या ये भी —) जो दिख रहा है, वो ना सत्य है ना असत्य है। क्योंकि मूल में कहीं वो भी तो मूल है, क्योंकि आप किसी भी एक कण का भी नाश नहीं कर सकते। तो जो हमें दिख रहा है — रूप — उसका नाश हो जाएगा, तत्व का नहीं। तो जिसका नाश नहीं होता, वो सत्य है। तो अगर आप किसी भी कण के कण के कण को ले लो, तो आखिरी में उसका नाश नहीं; रूप का नाश है, तत्व का नहीं। अब हम जिसे देख पा रहे हैं, वह तो सत्य नहीं, लेकिन उसके पीछे वाला सत्य, जिसके द्वारा वो है — पहले हम अपने सत्य को जानेंगे, तभी दूसरे के सत्य को जान सकते हैं। तो जब तक हम जानने से मुक्त नहीं होंगे — जानने से मुक्त होने के बाद आप जान जाएंगे, क्योंकि जानने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं; सत्य बचेगा। और सत्य को जानने से ही मुक्त हो जाओगे — सत्य को थोड़ी ना जानना है। अभी तो आपको जानने से मुक्त होने के लिए काम करना है, क्योंकि आपने बहुत कुछ जान लिया। आपको सच नहीं जानना है; आप जितना जाने हो, उससे मुक्त (होना है)।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25