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प्रश्नोत्तर P4-0136 · भाग 4

(वही साधक, पेंशनर) जैसे ही ईमानदारी का नाम लो, लोग ऐसे हट जाते हैं जैसे सांप ने डस लिया हो; उन्हें बस रंग वाली चीजें चाहिए जहां नाच-गान चले। बागेश्वर धाम में लोग 'जय श्री राम' करके खूब चला रहे हैं — मैंने कहा, आप गुरु हो, जिस विद्या से दूसरों को ठीक करते हो, वो विद्या किसी को देते क्यों नहीं? कम से कम एक को तो अपने जैसा बनाओ। इस पर आप क्या कहेंगे?

ये देखो, क्या होता है — कुछ शक्तियां होती हैं। हमें ये देखना है कि वो क्या कर रहे हैं उससे मेरा (क्या मतलब) — मैं क्या कर रहा हूं, ये देखना है। मैं आपको बताऊं — मैं लोगों को छू के ठीक कर देता था; अब हमें कुछ तकलीफ होती थी, दर्द था, हम टेबलेट खा लिए थे। तो यह सब शक्तियां ज्यादा देर तक नहीं टिकी रहतीं। तो मुझे देखना है कि मैं क्या कर रहा हूं। 'जय श्री राम' तो बोल रहा हूं — क्या राम का चरित्र अपने जीवन में उतार रहा हूं? तब 'जय श्री राम' बोलने का मतलब है। अगर मेरा चरित्र रावण का है और मैं 'जय श्री राम' चिल्ला रहा हूं, तो उससे कुछ होने वाला नहीं है। सीधी सी बात है। होने वाला किससे है? कुछ करने से, चिल्लाने से नहीं। तो राम का चरित्र जीवन में उतारो। एक बात बताओ, रामायण में कहां-कहां लक्ष्मण जी ने, भरत जी ने 'जय श्री राम, जय श्री राम' बोला है? कहीं नहीं ना। तो आप बताओ, अर्जुन को कृष्ण ने 'कृष्ण-कृष्ण' जपने को दिया क्या? कृष्ण ने अर्जुन को कर्म का सिद्धांत बताया। यह 'जय श्री राम' चिल्लाने से कुछ नहीं होगा; 'जय श्री राम' वाला काम भी है कि नहीं, वो देखो, क्योंकि काम से परिणाम आएगा, चिल्लाने से थोड़ी ना आएगा। तो आप जैसा वाक्य बोल रहे हो, जैसे शब्द बोल रहे हो, क्या उसमें जी रहे हो? राम का चरित्र जीवन में अपनाए हो? कृष्ण का, बुद्ध का, महावीर का, मीराबाई का, संत रविदास जी का, रामकृष्ण परमहंस का, स्वामी विवेकानंद का चरित्र जीवन में अपनाए हो? चरित्र अपनाने से कुछ होगा, बोलने से थोड़ी ना होगा। किसी का नाम राम रख दो तो क्या राम के गुण आ जाएंगे? वो तो सिर्फ शब्द रह गया। तो मुझे सारे प्रपंच को छोड़ते हुए ये देखना है कि मैं क्या कर रहा हूं। कहीं ऐसा तो नहीं — वो चिल्लाने में लगे हैं और मैं सुनने में लगा हूं — तो दोनों तो एक ही जगह हो। तुम कह रहे हो वो चिल्ला रहा है, तो तुम सुन भी तो रहे हो, तो दोनों तो एक ही जगह हो। नहीं, तुम आगे निकलो ना, तुम वहां चले जाओ जहां उसके शब्द सुनाई ना दें, तुम अपना काम करो। तो देखना ये है कि मैं क्या कर रहा हूं, क्योंकि मेरे करने से मेरा कल्याण होगा। (साधक ने कहा कि लोग परिक्रमा के लिए रात 12 बजे से भागते थे और मैं सोता था —) अब तो भागने वाला चक्कर अलग हो गया ना, लेकिन जब तक (वहां) थे, तुम भी तो वही भाग रहे थे — लोग परिक्रमा करके भाग रहे थे, तुम सो के भाग रहे थे — क्योंकि कोई पकड़ नहीं मिली। चलो, मिल गई ना पकड़, तो (वहां से) भाग चले। चलो, अब अपना कल्याण कर लो।

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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25