प्रश्नोत्तर P4-0175 · भाग 4
(वही साधिका) एक तरफ गोयल जी के पूर्व सत्कर्म इतने रहे कि यहां तक आ गए, 82 साल की उम्र में लग्जरी छोड़कर आए; दूसरी तरफ उसी गुरु को जांचने लग गए। तो क्या यह जीवात्मा खुद के साथ ही खिलवाड़ करती है — क्या यह खुद समझ के कर रही है?
अगर समझ के कर रहा है, तभी तो हो रहा है। अगर समझ के नहीं करता, तो किसी की ताकत नहीं (कि) करवा दे।
(जब) सेवक रूप में आपने उसे स्वीकार करवा लिया, तो बात ही खत्म हो गई। सेवक तो (वही है कि) वो अब जैसा कहेगा, वैसा करूं। (साधिका ने कहा कि उस समय उनका भाव सच्चा था —) सच्चा (भाव) आपने बनाया था; सच्चा था या नहीं था, वो तो विपरीत परिस्थितियों में पता चलता है। अगर सच्चा होता, तो परीक्षा में पास हो जाते। नाम लिखाने से थोड़ी पता चल जाता है। ये तो विषम परिस्थिति ही बता रही है कि (आपका) लेवल क्या है। जब विपरीत परिस्थितियां बनती हैं, तब पता चलता है आपकी स्थिति का।
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वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30