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प्रश्नोत्तर P5-0013 · भाग 5

(कुटिया में एक साधक) हम अपनी क्षमता खुद नहीं जानते — कंपटीशन में, सामने वाले को देखकर हम ज्यादा कर पाते हैं, जैसे जिम में ज्यादा वेट उठा लेते हैं। तो क्या ऐसे अपनी क्षमता बढ़ाना सही नहीं है?

(उसमें) गिर जाएगा आदमी। इसे क्षमता नहीं कहते हैं — वो तो जबरदस्ती किया आपने। (कंपटीशन में वेट) उठा तो लेते हो — आवेश में, जज्बात में; (पर) कभी पीछे की नस दब गई ना, तो जिंदगी भर रोओगे। आवेश है, जज्बात है। (क्षमता बढ़ानी चाहिए —) तो बढ़ानी चाहिए, लेकिन मेहनत करके — काजू, बादाम, किशमिश, छुआरा, मुनक्का खाओ, दूध, घी (लो)। खुद लायक बनो। बहुत लोग ऐसी गलती किए हैं, पछता रहे हैं — उन्हें पता था मैं वजन नहीं उठा पाऊंगा, लेकिन शर्त लगा के उठा लिया, (और अब) रो रहे हैं, बैक साइड की नस दब गई है। इसीलिए (ऐसा) नहीं करना चाहिए।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17