आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P5-0015 · भाग 5

(वही साधक) अगर लोग हमें स्वार्थी या कुछ भी कहें — हमें स्वीकार कर लेने की हिम्मत रखनी चाहिए ना? दुनिया के हर एक बंदे से हम कैरेक्टर सर्टिफिकेट कैसे ले सकते हैं?

जब आपने फैसला कर ही दिया — मैं एक घटना बता रहा हूं। होशंगाबाद है, जबलपुर के पहले, मैं वहां गया था — देहरी गांव था, एक महाराज जी थे, बंगाली बाबा, वो चौमासा कर रहे थे, (नर्मदा के) उत्तर तट पे। तो मैं स्नान करके नर्मदा जी (से) आ रहा था — फटे हुए, चिथड़े कपड़े, दातुन लिया, ऐसे कर रहा हूं। दो व्यक्ति आए, आपस में बात कर रहे — मैं उनको सुन रहा हूं — बोले, पागल लगता है; मुझे पागल बोले। धीरे-धीरे, डरते भी हुए, मेरे करीब आए — कहां से आए हो? बोला — मैं अपने गांव से आया हूं। बोले — यहां कैसे? बोला — तुम यहां कैसे? बोले — (मैं) भगवान के दर्शन करने आया हूं। बोला — भगवान गांव में नहीं है क्या? बोले — है। बोला — तो यहां क्यों आए? बोले — आईडी दिखाओ। बोला — तुम आईडी दिखाओ। बोले — मैं इसी गांव का हूं। बोला — कैसे पता चलेगा तुम इसी गांव के हो? मैं भी बोल दूं मैं इसी गांव का हूं; आप मांग रहे हो, तो किस आधार-बेस पे मांग रहे हो? कानूनन अधिकार तो है नहीं। मैंने ऐसा क्यों किया, (वो) नहीं बता रहा हूं। फिर वो लोग बोले — पागल है, हटो। कुछ बच्चे आ रहे थे, तो उन्होंने बच्चों से कहा — वो पागल है। लेकिन मैं बच्चों को देख के मुस्कुरा दिया; उस मुस्कुराने में बच्चे समझ गए, और जाके आराम से स्नान करने लगे। वहां भीड़ हो गई, तो मैंने कहा, एक काम करो, मैं आश्रम पे नहा लेता हूं। जब मैं आश्रम पर पहुंचा, तो मैंने मोटर चालू किया, और पाइप से नहा रहा था, और वो (दोनों) आ गए, मुझे देखने लगे; अब वो सोच रहे हैं कि ये यहां कैसे। फिर उन्होंने जिनके पास (मैं) गया था, उनसे पूछा, तो उन्होंने मेरा परिचय दिया। फिर नहा के मैं गया, तो उन्होंने कहा — आपने बताया क्यों नहीं? बोला — क्या बताऊं? तुमने पहले ही पक्का कर लिया था ये पागल है; तो पागल से पता पूछा जाता है? इतनी समझ तुम में नहीं है? जब तुमने मुझे पागल (होने का) फैसला ही दे दिया, तो पागल पता कैसे बताएगा? आपने मुझे समझदार तो समझा नहीं। तो कहने का मतलब है कि आपने मुझे जैसा समझा, ठीक है, कोई बात नहीं — क्या फर्क पड़ता है मुझे? आपके समझने से क्या मैं वो हो जाऊंगा? मैं जो हूं, वो हूं। पहले इस बात को सुन लो — मैं जैसा हूं, (वैसा) हूं। आप मुझे कुछ भी मान लोगे, (तो) मैं (वो) हो जाऊंगा क्या? आपके मानने से क्या होगा? और मैं आपको कुछ मान लूंगा, (तो) आप हो जाओगे क्या? ये लोहा है — पूरी दुनिया, पूरा विश्व (इसे) सोना मान ले, (तो) हो जाएगा क्या? बोलिए। नहीं होगा ना? तो आपके मानने से, मेरे मानने से कुछ नहीं होता। मैं जैसा हूं, आप मुझे वैसा स्वीकार करते हो, ठीक है; (नहीं तो) आप जाओ, बात खत्म। मैं अपना काम कर रहा हूं, आप अपना काम करने आए हो — इस जगत में आप जिसके लिए आए हो, वो कर रहे हो, मैं जिसके लिए आया, वो कर (रहा हूं)। (आपके) मानने में मैं थोड़ी ना हूं — आप कुछ कह दो, मैं मान लूंगा? आप हो कौन? और आप फैसला करने वाले हो कौन? और आपके करने से हो क्या जाएगा? मैं जैसा हूं, मैं हूं — बस इतना मैं समझता हूं। और मैंने अपने आप को स्वीकार किया है — तुम करो, चाहे ना करो, उससे मुझे कोई मतलब नहीं। मैंने समझ के किया — अगर मैंने कुछ किया, और मुझे पक्का पता चला (कि) सही है, (और) पूरा ब्रह्मांड (कहे) गलत है, तो मैं नहीं मानूंगा, क्योंकि मैंने अपनी समझ से किया है; तुम्हारी समझ का मेरे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। और मेरी समझ से गलत है, (और) पूरा ब्रह्मांड सही कहे, (तो भी) मैं नहीं मानूंगा। (उसका) प्रमाण भी तो मेरे ऊपर ही आ रहा है — अपने कर्म की जवाबदेही (मेरी है)। अगर यह सही है, तो मेरे सामने गलत सिद्ध करो — तुम सिद्ध भी नहीं कर पा रहे हो, तो मेरे ऊपर मान्यताएं काम नहीं करतीं। (कैरेक्टर सर्टिफिकेट —) कोई जरूरत ही नहीं है ना मेरी। अगर मैं (सर्टिफिकेट) ले भी लूं, तो क्या हो जाएगा? मुझे पता है मैं कौन हूं। अगर मैं आपसे ले भी लूं, तो क्या हो जाएगा — क्या वो आखिरी होगा? मैं फिर आगे जाऊंगा, कोई कहेगा तुम ये हो — तो वो (सर्टिफिकेट) तो फेल कर दिया; आखिरी तो है नहीं। इससे वो प्रमाणित हो रहा है कि मैं ही नकली हूं, मेरे अंदर कमजोरी है, इसलिए मुझे इससे, इससे, इससे लेना पड़ रहा है — कि दुनिया क्या कहेगी; इससे मुझे पता लग रहा है कि मैं ही कहीं वीक हूं, मैंने अपनी ही वैल्यू नहीं समझी। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। जैसे शेर को कोई बोल दे कि ये कुत्ता है — शेर को क्या फर्क पड़ेगा? वो तो जब दहाड़ेगा, तो पता ही चलना है वो क्या है। (हो सकता है जिसने कहा, उसे चित्र में शेर को कुत्ता ही बताया गया हो —) एक कह रहा है कुत्ता, एक कह रहा है शेर — काम की बात आएगी, तो वो अपना सही तरीके से काम कर देगा, कुत्ता हो या शेर हो, क्या फर्क पड़ता है? उसके पीछे कोई काम है — तो आप देख लो, किस लिए गए थे।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17