प्रश्नोत्तर P5-0021 · भाग 5
(कुटिया में साधिका) मुझे भजन आता है; संतों ने कहा कथा सीखो — क्या कथा सीखूँ? भजन-कथा का पैसा आए तो लेना चाहिए? इस लाइन में जाना है या नहीं?
आप आत्मिक कल्याण चाहती हो — कथा में कैसे जा रही हो? कथा सीखो नहीं; कथा में जियो। ऐसी गलती मत करना — नर्क में भी जगह नहीं मिलेगी। लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए मत सीखो; पहले उसमें जियो; जब उसी स्थिति पर पहुँचो तो खुद का ज्ञान देना। कथा स्वयं के आनंद के लिए है, व्यापार के लिए नहीं। भजन हो या कथा — एकांत में जाके अपने लिए गाओ; कहीं जाके गाने की क्या जरूरत? अपनी मतवाली चाल में चलो; कोई क्या कहता है छोड़ दो — बस चाल से किसी को तकलीफ न हो। लोगों के बीच रहना पड़ेगा तो उस लायक बनो; ताकतवर बनो। भजन का पैसा लेना ही नहीं चाहिए। एक तरफ आत्मिक कल्याण की बात, और कथा में जिए बिना रट्टा मार के शुरुआत — उसे नर्क में भी जगह नहीं मिलेगी। तुलसीदास कहते हैं — कथा स्वयं के आनंद के लिए। अगर किसी की मदद के लिए खुद आत्मिक गिर रही हो तो क्या होगा — शरीर का दुख आज-कल खत्म होगा; आत्मा गिर गई तो उठाने में जिंदगी लग जाती है। आपके जीवन का फैसला आपके हाथ में है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17