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प्रश्नोत्तर P5-0025 · भाग 5

(संदर्भ: गुजरात में एक युवक) मन में उल्टे-सीधे गंदे विचार आते हैं; नॉनवेज खाता हूँ — छोड़ दूँ या खाऊँ? हर बात अपनी पर्सनल क्यों?

ये तेरी हालत नहीं — यही हालत मेरी थी, सबकी हालत है। विचार देश-काल-परिस्थिति में आते-जाते हैं; जैसा नॉलेज है वैसा ग्रहण करोगे। किस विचार पर काम करना है देख ले। नॉनवेज — मुझसे पूछ के खाया था? छोड़ना चाहता है तो तेरी मर्जी; खाएगा तो परिणाम तुझे, छोड़ेगा तो तुझे। मैं कौन होता हूँ फैसला देने। अपना पछतावा हो तो छोड़ दो; नहीं तो कर्म का परिणाम। मेरे बोलने से छोड़ा तो नाटक होगा — दो-चार दिन का। खुद का विचार होना चाहिए। आँखें बंद करके बात नहीं बनेगी — आँखें खोलो, जान की बाजी लगाओ। बलिदान देना पड़ता है। मैंने जवानी का बलिदान दिया। सोचो — ब्याह भी, बंगला भी, और आत्मिक कल्याण भी — कई जन्म लग जाएँ तो भी नहीं होता। बातों से बात नहीं बनती; जीवन लगाना पड़ता है।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17