आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P5-0085 · भाग 5

जब घुटन-बेचैनी हो और कुछ करने का मन न हो — रुकना है; पर काम करना ही पड़ता है तो क्या?

जब ऐसी स्थिति बनती है, मुझे अपने आप में रहना है। मैं जहां हूं, किसी के सानिध्य में हूं, तो मुझे कहीं अपने आप को नहीं लगाना है। अगर वह कह रहा है कि यह करो, तो मैंने कर दिया, करके हट गया। मुझे उसमें लिप्त नहीं होना है। मैं करके भी नहीं किया। मैं कहीं अपने आप को रस में नहीं लगा रहा हूं। मैं तो अभी भी उस घुटन में हूं। क्योंकि कोई अगर कह रहा है, यह कर दो, तो सत्कर्म है। मुझे करके, कर दिया, छूट गया, क्योंकि उस रस ले ही नहीं सकता। घुटन चली जाती है। उसमें मुझे लिप्त ही नहीं होना है। मुझे करके, घुटन तो चल ही जाएगी। घुटन भी थोड़ी टिकेगी। लेकिन मुझे कहीं से रस नहीं लेना है। अगर मेरे से कोई योग्य कहे, जिस सानिध्य में मैं हूं। ऐसा नहीं कि भाई, मेरी स्थिति तो ऐसी है, तो तुम तो गिर जाओगे। तो सत्कर्म ही तुमने छोड़ दिया। मुझे कहीं नहीं लगना है। अगर कोई कह रहा है, वह भी मेरे से योग्य है, वह कह रहा है कि यह कर दो, तो वह तो मैं करके भी नहीं कर रहा हूं। वह तो मेरे द्वारा सत्कर्म हो रहा है। लेकिन मुझे अपनी घुटन को लेकर कहीं खुद नहीं लगाना है। अगर वह सामने वाला कह रहा है कि यह कार्य कर दो, तो वह कार्य कर दिया। बात खत्म। मैं तो वहीं का वही हूं। मैं कार्य करते हुए भी वही हूं। यह कार्य उसका मैं कर रहा हूं, उसके द्वारा कर रहा हूं। मेरे द्वारा कुछ नहीं करना है उस समय। नया रस पान नहीं करना है। नया रस नहीं लेना है। अगर आप किसी के सानिध्य में रह रहे हो, आप उसे परेशान कर ही नहीं सकते। वहां सिर्फ सुधर सकते हो, या तो भगा देगा। आप उसे कभी परेशान नहीं कर सकते। गलती हो जाए तो ध्यान दो कि आगे से ऐसा न हो। प्रयास तो हो जाता है कि आगे से ऐसा न हो। फिर भी हो ही जाता है। कोई बात नहीं। हो जाता है। उसका काम है बताने का। मेरा काम है, आगे से ऐसा न हो। कोई बात नहीं। घिसते रहो। जब पहुंच जाएगा। करत करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान। रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निशान। कोई बात नहीं। जानबूझ कर मत करो। हो गया तो क्या करूं, मैं भूल ही जाता हूं। तो कोई बात नहीं। आपने कहा तो मैंने किया, और मैंने याद रखा। भूल गया तो मैं क्या करूंगा। कोई बात नहीं। घिसते रहो। मैं तुझे छोड़ नहीं रहा हूं। तू मत छोड़ना। आने दे। विचारों को छोड़। तू क्या कर रहा है, वह देख। मैं क्या बोल रहा हूं, वह सुन, और उतना कर। विचार आ रहे हैं, आने दे। उन्हें हटा भी मत। आने दे। क्या करने से परिणाम आएगा। विचार आ रहे हैं, आने दे, क्योंकि हमारे पीछे किए गए कर्मों के ही तो विचार हैं। हमें खींचेंगे। मेरा काम यह है कि मेरा उद्धार किस में है। मुझे सिर्फ उतना करना है। तू ईमानदारी अपना ले। ईमानदारी उनके अंदर है, अपनाने की क्षमता, तभी तो कह रहा हूं। कोई बात नहीं। धारण कर लिया। लेकिन अब तो छोड़ दे। देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में धारण हो गया। कोई बात नहीं। अब छोड़ के, ईमानदारी अपना कर, सत्कर्म में लगे रहो। घिसते रहो अपने आपको। क्या कपड़े को एक बार में मैल छूटता है। दो बार में नहीं। फिर एक पाउडर से नहीं छूटता, दूसरा लाते हैं, तीसरा लाते हैं। आला लाते हैं। साबुन से काम नहीं चलता तो आला डालते हैं। लेकिन अब रंग का कपड़ा है तो आला भी नहीं डाल सकते। किसी न किसी तरीके से घिसते रहते हैं। आंसू भी गिर जाएं तो वे भी बेईमानी के ही लगते हैं, ऐसा लगता है। कोई बात नहीं। वह स्थिति सही है या गलत है। न गलत है, न सही। क्या कर रहा है, उससे परिणाम आएगा। बस वही। क्या विचार आ रहा है, उससे परिणाम नहीं आएगा। मैं क्या कर रहा हूं, उससे परिणाम आएगा। विचारों में मत भागो। विचारों को रोको भी मत। क्योंकि विचार हमारे पिछले कर्मों से आएंगे ही आएंगे। तुम बस क्या कर रहे हो, वह देखो। जैसा करोगे, वैसा बन जाओगे। विचारों के पीछे नहीं जाना है। जो कुछ हो रहा है, जो कुछ होगा, जो स्थिति के साथ में जो भी हो रहा है, उसको साइड करो। और जो कर रहे हो, उस पर पूरा ध्यान लगाओ। लगे रहो।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 9 अगस्त 2026 · 2026-08-09