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प्रश्नोत्तर P5-0121 · भाग 5

परिवार/लोग विवश-परेशान करें तो क्या? बंधन कैसे बनता है? उकसाने पर क्रोध क्यों?

अपना बनाओ ही मत। परिवार में होता है ना। बिजनेस करना है, परिवार बसाना है। बिजनेस करके घर में आता है ना, और खाओ-पियो। एक में हिसाब रखो, अलग क्या। अगर आत्मिक स्तर उठाना है, और गिराना है तो सब लपेट-लपेट के आनंद कर लो। हिसाब-किताब नहीं रखने वाला व्यक्ति परेशान रहता है। बिजनेस करता हूं, वह फैमिली पर्सनल है। फैमिली में आए, बिजनेस अलग है। ऐसे फैमिली का त्याग कर दो, जो फैमिली आपको विवश करे, परेशान करे। तो ऐसे फैमिली के पास रहना क्यों। नहीं। क्यों? इजी नहीं है। गलत आदमी के साथ जिंदगी क्यों जीना। अच्छा, एक बात बताओ। सुनो। आपको अगर इस उंगली में कैंसर हो जाए, किसी को भी, और पक्का हो जाए कि अगर आपने इसे नहीं कटवाया तो यह पूरा शरीर खराब कर देगा, तो क्या करोगे? उधर अप्लाई नहीं होता। नहीं। क्यों नहीं होता। अप्लाई नहीं होता तो नहीं। अप्लाई करोगे तो भोगो। नहीं अप्लाई करोगे तो भोगो। होता है, आप भोगोगे। आपको भोगना पड़ेगा। अभी शरीर को बचाने के लिए उंगली कटवा दोगे। नहीं? हाथ भी अगर कटवाना हो तो शरीर को बचाने के लिए कटवा दो। अगर मेरी भावनाओं को कोई नहीं समझ रहा है, अगर मुझे ईमानदारी से नहीं जीने दे रहा है, तो अपना हो ही नहीं सकता। तो ऐसे व्यक्ति, ऐसे जगह का त्याग कर देना चाहिए। बात खत्म। अगर कोई व्यक्ति मुझे गिरा रहा है तो अपना कहां हुआ। अपना तो उठाता है ना। यह बात मैं इसलिए बोला। पिता हो, माता हो, बेटे का हो, बेटी का हो। दूसरे के घर शादी करते हैं ना। बाद में भी उधर, वो पैसे दे दो, ये पैसे दे दो, थोड़ा हेल्प करो। ऐसा करता है। वही फैमिली सेंटिमेंट। लेकिन मैंने कहा, त्याग ही परम सुख है। उन व्यक्तियों का त्याग कर दो, उस जगह का त्याग कर दो, जो लोग मुझे समझते नहीं। वो लोग एडवांटेज लेते हैं। ये लोग देने का फोर्स करते हैं। उसका त्याग ही परम सुख। करना पड़ेगा। और नहीं तो भोगो। बंधन कैसे बनता है। अपने तरीके से जब मुझे कुछ चाहिए, तो उसमें बंधन बनता है। या तो राग का, या तो द्वेष का। तो अपने तरीके से चाहिए, उसका त्याग करें। उचित तरीके में जियो। योग्यता से ज्यादा जब आपको मिलता है, तो उसमें राग-द्वेष होता है। योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग करो। लोगों के उकसाने पर क्रोध क्यों होता है। उकसाने पर इसलिए क्रोध होता है कि आपको बैक सपोर्ट मिल जाता है, और सामने वाला कमजोर रहता है, तब आपको क्रोध आ जाता है। पहले क्रोध इसलिए नहीं आया। क्रोध तो आया, लेकिन बाहर इसलिए नहीं आया कि वह मजबूत था, आप कमजोर थे। और जैसे ही आपको बैक सपोर्ट मिल जाता है, आप उस पर क्रोध कर बैठते हो।

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