प्रश्नोत्तर P5-0134 · भाग 5
आप कहते हो चल अपने घर — घर कहां है? कामना छोड़कर कैसे जाएं?
उसी का तो हमें पता लगाना है। जब मैं शरीर के द्वारा कामनाएं छोड़ दूंगा, अभी शरीर के द्वारा कामनाओं की, वासनाओं की पूर्ति कर रहा हूं, जब वह मैं छोड़ दूंगा, तब। क्योंकि जब तक मैं शरीर के द्वारा कोई कामना कर रहा हूं, तो यही मेरा घर है। अगर मैं कामना छोड़ दूंगा तो मैं यहां से मुक्त हो गया, तो इसके बाद मैं अपने घर जाऊंगा। लेकिन पहले यह छोड़ो। कामना छोड़ने के बाद ही जा सकते हो, पहले कैसे जाएंगे? तब तक तो यही घर आपका है ना। आधी छूट गई और कुछ बची, तो एक रत्ती भी बची है तो आप यहीं हो। मैं कह रहा हूं, किसी का बहुत बड़ा मकान है, किसी की एक झोपड़ी है, तो दोनों को घर ही बोला जाएगा ना। किसी का कई किलोमीटर में घर हो और किसी की एक झोपड़ी हो, दोनों को घर ही बोलोगे। तो चाहे इतना हो चाहे इतना, अगर तुममें मोह है, वासना है, तो तुम यहीं हो। वासना मतलब रस लेना; बेईमानी से कुछ भी पाने की इच्छा है तो वह वासना है। ईमानदारी से कुछ पाने की इच्छा वासना में नहीं आएगी, वह तो जरूरत है, चाहे मेरी जरूरत, चाहे उनकी जरूरत जो लोग मुझसे जुड़े हैं। तो बस कामनाओं से मुक्त हो जाओ।
यह भी हो सकता है कि मेरा घर कल्पना में हो, वास्तव में नहीं हो। तो इस घर से परेशान हो या नहीं हो? ऐसा तो नहीं कि इस घर में बड़े आनंद में हो। जिस घर में हो, उसमें बड़ी घुटन है। तो पहले यह घर छोड़ो। कल्पना ही सही, छोड़ने के बाद पता तो चल जाएगा, कम से कम वह भ्रम तो मिटेगा। कोई रिस्क तो नहीं है ना कि बहुत बड़ा महल छोड़ रहे हो जिसमें आनंद है। जिस घर में तुम रह रहे हो उसमें बहुत घुटन है, तो पहले वहां से छोड़ो। अगर वह घर कल्पना भी होगा तो पता तो चल जाएगा, तुम मुक्त तो हो गए, भ्रम तो टूटा ना। कोई रिस्क नहीं है, हमारे पास कुछ है ही नहीं। क्योंकि जहां मैं हूं, अगर दुखी हूं, तो वैसे छूट जाए तो ज्यादा अच्छा है, दुख मिटेगा। अगर पीछे कुछ नहीं है तो भी मैं तो हूं, दुख से तो मुक्त हुआ। और अगर मैं जहां हूं वहां प्रसन्न हूं, तो सवाल ही नहीं उठता; तब तो कोई घसीटे तो भी नहीं जाओगे, शरीर से जाओगे, मानसिक नहीं जाओगे। और अगर छूटोगे तो वहीं जाओगे।
वासना छोड़ते ही बीच में कोई स्टेशन नहीं आएगा; या तो यह घर, या तो वह घर। आप बोलते हो कि छोड़ने में स्टेशन है, तो जब आप छोड़ रहे हो, आपके पास एक घर थोड़ी है, बहुत सारे हैं। आपके पास घर ही घर हैं। एक घर तो भौतिक दिख रहा है, इतने घर हैं कि आपको खुद नहीं पता। अनेक पिंडों में घुसे हुए हो। हो सकता है सामने वाले को भी पता ना हो। जीवन में बहुत लोग ऐसे हैं जिनसे मेरा राग-द्वेष है और उनको पता नहीं है। जैसे अपने दोस्तों में शादी तक की बात कर लेते हैं और जिससे शादी करनी है उसे कुछ नहीं पता; स्कूल-कॉलेज में ऐसा ही होता है कि यह तुम्हारी भाभी, वह तुम्हारी भाभी, और उस भाभी को कुछ नहीं पता, और वह किसी और की भाभी बन गई।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 16 अगस्त 2026 · 2026-08-16