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प्रश्नोत्तर P5-0140 · भाग 5

भोग की इच्छा भी है और भोग से मुक्ति की भी — कौन सा रास्ता? शादी करूं या नहीं?

देखो कि भोग आप जरूरत में कर रहे हो या वासना में। अगर भोग को केवल जरूरत में यूज़ करोगे तो आप मुक्त ही हो जाओगे, प्रयास नहीं करना पड़ेगा। अब यह आपको देखना है कि शादी आपकी जरूरत है क्या, क्योंकि अध्यात्म अलग है, शादी अलग है। ऐसा जरूरी नहीं कि शादी ना करो तो जन्म बच जाए; हो सकता है शादी ना करो तो भी जन्म चला जाए। हो सकता है शादी करके भी आप ईमानदारी, सत्कर्म के साथ आध्यात्मिक जीवन जियो, तो आपका वहां कल्याण हो जाएगा। और हो सकता है शादी नहीं की लेकिन बेईमानी में लगे हो, तो इससे क्या होगा? तो यह आपको देखना है कि मेरा उद्धार कैसे होगा, क्या मैं शादी करके भी अपने उद्धार के लिए काम कर पाऊंगा। ऐसा मत सोचना कि शादी नहीं करूंगा तो उद्धार हो जाएगा; हो सकता है और भी अपना पतन कर लो, अपनी ऊर्जा को गलत जगह लगाओ। सर्वप्रथम ईमानदारी को धारण करो और सत्कर्म को। अब क्या करना है, देखो, लेकिन यह ना छूटे, तो तुम्हारा आत्मिक कल्याण हो जाएगा। चाहे शादी करो, चाहे ना करो, इससे कोई मतलब नहीं है। देख लो कि आपका उद्धार किसमें है, शादी करके उद्धार है कि शादी ना करके। पूरी तरीके से निश्चित करके ही कोई कदम उठाना, और जल्दी से जल्दी, क्योंकि 60 के बाद सोचोगे कि शादी हो जाए, तो भी नहीं होगी। पक्का तुम्हें करना है, यह आप ही को पक्का करना है। हां, यह ध्यान रखना कि सामने वाले को तकलीफ ना देना। पता चला कि ले आए और दो महीने बाद बोल रहे हो कि मैं आध्यात्मिक हूं, घर छोड़ के जाने लगे। किसी का जीवन नर्क ना करना, नहीं तो उसका भी दोष लग जाएगा। पता चला तुम शारीरिक वहां हो लेकिन मानसिक कहीं और हो। वह तो आध्यात्मिक नहीं है, उसकी इच्छा शादी की है। तुम शादी बोल के कर रहे हो, तो शादी का पूरा फर्ज निभाना; करना है तो करो, नहीं तो मत करना।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 16 अगस्त 2026 · 2026-08-16