प्रश्नोत्तर P5-0150 · भाग 5
अशुद्धि अपने आप क्यों आती है? शुद्धता के लिए क्या करना पड़ता है?
हमारी जरूरत तो अनाज की है, हमें घास-फूस थोड़ी चाहिए, लेकिन वह अपने आप पैदा हो जाता है। पैदा होता है, लेकिन अगर हमें फसल उगानी है तो हम उसे निकालते हैं ना। तो ऐसे ही अगर अपने आप को समझना है, तो हमें गंदगी निकालनी पड़ेगी। गंदगी अपने आप आ रही है, लेकिन उसे लो मत ना, उसको ग्रहण मत करो। तभी तो आपकी परीक्षा होगी कि आप शुद्धता की तरफ बढ़ रहे हो या नहीं। अशुद्धता अपने आप आती है, शुद्धता के लिए हमें प्रयास करना पड़ता है।
क्यों आती है? क्योंकि हमने अशुद्धि धारण कर ली। हमारे जीवन में सबसे ज्यादा अगर हमने कुछ काम किया है तो अशुद्धि का किया है। आपने बचपन से लेकर आज तक सबसे ज्यादा शुद्धता का काम किया या अशुद्धता का? ज्यादा तो आपने उसे ही बनाया ना। यह पीछे से नहीं आ रही, हमने पैदा किया। शुद्धता तो आपका स्वभाव है, तो उसको क्यों नहीं बढ़ाया? चाहे जहां से भी आ रहे हो, आप ही आ रहे हो ना। सबसे पहले आप शुद्ध थे, लेकिन धीरे-धीरे आपने अशुद्धि धारण की, सबसे ज्यादा उसी को बढ़ावा दिया, और आज आपके पास सबसे ज्यादा अशुद्धि है, इतनी ज्यादा हो गई कि आप उसी से परेशान हो।
जैसे आदमी ने शुरुआत में मौज-मस्ती के लिए गुटका खाया, लेकिन आज इनकी उम्र लगभग 49 है और 20 साल से गुटका खा रहे हैं। अब यही आदमी खा के पछता रहा है, इसे पता है यह गंदा है, लेकिन छोड़ नहीं पा रहा। इसके अंदर छोड़ने के लिए पछतावा है, तभी तो विचार बनाया। लेकिन इसके अंदर छोड़ने की ताकत नहीं मिल रही थी, यह कमजोर था। तो प्रकृति ने कहीं से ताकत दी। मैंने बोला ना, प्रकृति कल्पवृक्ष की तरह है, आपको जो चाहिए, ऐसे लोगों से मिलाती है। तो यह व्यक्ति अभी विचार करते ही इस आदमी के पास आ गया, और तुरंत इसका भाव इतना प्रबल हो गया, क्योंकि कई सालों से पछता रहा था, कि जा, तुझे अब ऊर्जा वहां से मिलेगी और छोड़ने में तुझे आसानी होगी। तेरी ताकत नहीं हो रही है, लेकिन मैं तुझे ऐसे व्यक्ति से मिला रहा हूं जो तुझे सलाह देगा, तुझे समझ में आएगा, तुझे ऊर्जा मिलेगी और तू उसे फेंक पाएगा। हमने आपको कई बार कहा है कि जो आपको चाहिए, वैसे लोग मिलेंगे। यहां तो यह सामान छोड़ने आया था, हमारे पास बैठने थोड़ी ना आया था; देखा सब लोग बैठे हैं, तो जब तक सामान खाली होगा तब तक हम भी बैठ लेते हैं।
हर आदमी को गलत-सही का पता है, लेकिन उसने अपनी गलतियों को इतना बढ़ा दिया है कि छोड़ना भी चाह रहा है, लेकिन उसके अंदर वह ताकत नहीं है, क्योंकि उसने सात्विक एनर्जी बहुत कम कर दी, इतनी कम कर दी कि वह फैसला लेने के लायक ही नहीं रहा, उसका आत्मविश्वास उठता ही नहीं, इतना अपने आप को दबा दिया। वह ताकत कब मिलेगी? जब आप सात्विक एनर्जी के पास, सात्विक के पास चले जाओगे, तो वह अपनी तरफ से आपकी आत्मा को ताकत देगा, सीधा सहारा लगा देगा। इस व्यक्ति के घर वाले परेशान थे, यह नहीं छोड़ रहा था, पत्नी समझाती होगी, बच्चे समझाते होंगे, लेकिन यहां कुछ देर बात हुई और छोड़ दिया। इसकी सात्विक ऊर्जा जागृत हो गई, आत्मा को पोषण मिल गया, आत्मा की ताकत और हो गई, और इसने तुरंत फैसला ले लिया। हम जब भी बुराइयों की तरफ जाते हैं, हमारे घर-आसपास वाले लोग समझाते हैं, लेकिन समझाने वाले की इतनी ऊर्जा नहीं है कि वह काम कर जाए। तो जब आप सच में समझने वाले रहोगे, तो धीरे-धीरे आपको ऐसी ऊर्जावान जगह भेज देगा कि आपका भाव तुरंत प्रबल हो जाएगा और बुराई छोड़ने में बड़ी आसानी होगी। इसलिए कहा गया है कि हमारे जीवन में संगत का बहुत असर पड़ता है। यह व्यक्ति मेरे बारे में नहीं जानता, मैं इसके बारे में नहीं जानता, लेकिन आत्मिक ऊर्जा इसको इधर से मिली और इसने तुरंत फैसला लिया कि यही मेरे लिए ठीक है, इसे बल मिल गया। जिसको पैसे से खरीदा था, उसको फेंक के खुश है। अगर जेब से गिर जाता तो पछताता कि मेरा गुटका गिर गया। यह होता है बल।
इसलिए कहा गया है कि आपको जो चाहिए, मिलेगा, बस आप अपने भाव को बनाइए। हम तो लाइव लोगों के लिए सत्संग करने वाले थे, प्रश्न-उत्तर लेने वाले थे, इसका गुटका थोड़ी ना छुड़ाने के लिए सत्संग कर रहे थे, लेकिन शुरुआत इसी से हो गई। अब हमेशा के लिए छोड़ना; थूकना तो चाटना मत। आप लोगों के लिए कुटिया का निर्माण हुआ है, कभी भी आना, संकोच मत करना, अपना आत्मिक कल्याण करना, लेकिन अब खाना मत। आपके लिए भी अच्छा है, पैसे भी बचेंगे, कचरा खाने से बच जाओगे, और आप खुद पछता रहे थे।
इसी चीज को समझो। कोई भी अपने जीवन में बुराइयों की तरफ जा रहा हो, तो छोड़ दो, अभी समय है, और आप ही को छोड़ना है, क्योंकि वह बहुत तेजी से बढ़ता है। जितनी भी झाड़ की चीजें हैं, बहुत तेजी से बढ़ती हैं। बुराई अगर आप एक पकड़ोगे तो दो मिलेंगी, उसके साथ और आ जाती हैं; इसकी पैदावार बहुत तेज है।
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वीडियो: Live प्रत्यक्ष ज्ञान प्रश्न और उत्तर / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-10-15