प्रश्नोत्तर P5-0153 · भाग 5
निर्विकार होने का भाव कैसे बनाएं? विकार कैसे हटें?
जरूरत में भाव पैदा होता है। भाव तो दो में रहेगा ना; एक में आ गया तो कैसा भाव? भाव भी दो में काम करता है, इसका ऐसा भाव है, उसका वैसा भाव है। एक में आने के बाद तो भाव भी खत्म; किसके लिए भाव करोगे? भाव तो किसी के लिए करना कर्म में आता है ना, कर्म के पहले और कर्म के बाद एक भाव बनता है, उससे फल का निर्णय होता है। अब कुछ नहीं चाहिए, तो भाव क्या? इसलिए आप निर्विकार होने का भाव बनाइए, कि विकार मुझसे कैसे हटें, उन्हें हटाने का भाव बनाइए। यह आखिरी भाव है। यह भाव प्रबल हो गया और इस पर काम किया, तो विकार खत्म होंगे। विकार आपने धारण किए हैं, उनसे अब अपने आप को हटाना है।
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वीडियो: Live प्रत्यक्ष ज्ञान प्रश्न और उत्तर / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-10-15