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प्रश्नोत्तर P5-0158 · भाग 5

हनुमान चालीसा 40 दिन 100 पाठ किया, पॉजिटिविटी मिली पर प्रभु दर्शन नहीं मिला — मार्गदर्शन चाहिए।

कुछ नहीं चाहिए, ऐसे होकर उनके दर्शन के लिए काम करो। उनसे भक्ति करो, निर्विकार होने के लिए भक्ति करो, उतनी पवित्रता लाओ। ऐसा कुछ करो कि प्रभु आपको दर्शन देने के लिए तरसें; आप कहो मत दो, तो भी दें। सब तो प्रभु दर्शन के लिए घूम रहे हैं। ऐसा काम करो कि प्रभु आपके लिए तरसें; आपको प्रभु के लिए तरसने की क्या जरूरत? इतना प्यार कर लो कि किसी और से प्यार करने के लायक ना रहो, इतनी मोहब्बत, इतना प्रेम आपके अंदर होना चाहिए। तुम क्या हो? वासना में बस घूमते रहते हो। प्रभु नहीं चाहिए, प्रभु से माल चाहिए, उसके लिए प्रभु चाहिए। प्रभु नहीं चाहिए, प्रभु की ताकत चाहिए। अगर प्रभु के पास कुछ ना हो, तो प्रभु भी नहीं चाहिए। माल के लिए प्रभु चाहिए, और यह बात प्रभु को पता है कि यह मुझसे मिलने के लिए नहीं, माल के लिए, ताकत के लिए मुझे बुला रहा है; अगर मेरे पास ताकत नहीं होती तो मेरे पास खड़ा भी नहीं होता। प्रभु को इतना पता है कि यह प्रभु मिलन के लिए नहीं, प्रभु से मिलने पर कुछ हो जाएगा, उसके लिए बुला रहा है। और जब तक यह रहेगा, तब तक प्रभु दर्शन नहीं होगा। अभी तक आप क्या हो? प्रभु से इसलिए मिलना चाहते हो कि उससे मिलके कुछ हो जाऊंगा। क्या पैसे वाला हो जाऊंगा, नाम, शोहरत, पैसा, गाड़ी, बंगला; और अगर यह नहीं, अध्यात्म में आ गए, तो ज्ञानी हो जाऊंगा, परम ज्ञानी हो जाऊंगा, मोक्ष मिल जाएगा, मुक्ति मिल जाएगी, गुरु बन जाऊंगा। कुछ ना कुछ है, तो प्रभु चाहिए ही नहीं। हमें तो उससे कुछ ना कुछ चाहिए, इसलिए प्रभु चाहिए, और यह बात प्रभु को मालूम है, इसलिए वह आता नहीं है। उसे पता है कि इसे क्या चाहिए; वह दे देता है और बस उसमें लगा देता है कि तू लगा रह इसमें। मैं एक जगह था, वहां मैंने बोल दिया था कि जब तक जाग रहा हूं, कोई भी आए; एक बार सो गया तो कोई भी आए, इमरजेंसी हो तो उठाना, नहीं तो मत उठाना। तो मैं बाहर निकला तो बालकों ने कहा कि महाराज जी, आपसे दो लोग मिलने आए थे, बहुत देर रुके, आप नहीं निकले तो चले गए। मैंने पूछा, कुछ काम बता रहे थे? बोले, नहीं, दर्शन के लिए आए थे। मैंने कहा, अभी तक पृथ्वी पर ऐसा एक भी आदमी नहीं मिला मुझे जो मेरे लिए आया हो; ऐसा कैसे हो सकता है? मैंने पता लिया कि कहां से आए थे, उस गांव में गया, दोनों आदमियों का पता किया, उनसे मिला, बुलाया, बैठा और बोला, बताइए, आप मुझसे मिलने आए थे? बात धीरे-धीरे बढ़ी, तब उन्होंने अपना काम बताया कि किस काम के लिए आए थे। तो मेरा भ्रम टूटा, नहीं तो जिंदगी भर सोचता कि कौन ऐसा आदमी था जो मुझे खोज रहा था। मुझे अगर कोई खोजे, तो मेरे समझ से वह या तो परमात्मा है, या परमात्मा के एकदम करीब रहता है, उससे उसकी बातचीत सीधी होती है। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। आप खुद इस पर अनुभव करो। आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सिर्फ आपको खोजे? नहीं, उसको कुछ ना कुछ आपसे चाहिए। आपके रूप को भी नहीं, रूप के पीछे वाले को देखने की तो क्षमता ही नहीं है। कोई रूप को देख रहा है, कोई शब्द को, कोई सुगंध को, कोई स्वाद को, कोई स्पर्श को देख रहा है, लेकिन मुझे कोई देखे, मुझसे मिलने आए, ऐसा कोई पृथ्वी पर व्यक्ति हो जो मुझे खोज रहा हो, तो जरूर वह परमात्मा ही होगा, या फिर परमात्मा जैसा ही होगा, क्योंकि दो से एक में हो जाता है, फिर वह परमात्मा में विलीन हो जाता है, कुछ बचता नहीं। इसलिए उन लोगों को ढूंढते-ढूंढते गया कि क्या पता कौन महापुरुष हैं जो मुझसे मिलने आए थे, जीवन में पहली बार कोई मुझसे मिलने आया। तो प्रभु दर्शन नहीं चाहिए; प्रभु के दर्शन से कोई कामना है, कोई इच्छा है, कोई उम्मीद है कि आप उसे पूरा करें। प्रभु आके भी क्या करें? प्रभु की ताकत चाहिए। और जब तक ऐसा भाव है, तब तक दर्शन नहीं। अच्छा, आ भी जाएं और प्रभु बोलें कि मेरी ताकत खत्म हो गई, तो आप कहोगे, प्रभु जाओ; उसी के लिए तो हमने तुम्हें बुलाया था, और आके कह रहे हो कि मैं खाली हूं, तो निकल लो, क्योंकि खाली लोगों को हम पूछते नहीं। हम संसार वाले ऐसे हैं कि भरे-भरे को पूछते हैं, खाली को तो कचरे में फेंक देते हैं, इस खाली का बोझ और कौन ढोएगा। हम जीवन भर नोट को लक्ष्मी-लक्ष्मी कहके, गिर जाए तो उठाकर माथे से लगाते हैं, और जब नोटबंदी हुई तो सब आग लगा दिए, फेंक दिए। क्योंकि लक्ष्मी उसमें नहीं थी? जब तक उसमें ताकत थी, चल रहा था, तब तक लक्ष्मी थी, और जब फैसला हो गया कि यह नोट नहीं चलेगा, तो नोट फेंके गए। लक्ष्मी कहां गई? तुम्हारा भाव कहां गया, तुम्हारा समर्पण कहां गया, तुम्हारी श्रद्धा कहां गई? तब तो नोट को गिरते ही उठा लेते थे, सीने से लगा लेते थे। अब 50 पैसे, एक रुपया गिरा है, तो उसे नहीं उठाते। पहले जब गरीबी थी तो पांच पैसा, दस पैसा भी गिरे तो लक्ष्मी थी। अब क्या हुआ? लक्ष्मी है, लेकिन उसकी ऊर्जा कम हो गई, इसलिए नहीं झुकते; कौन अपना समय खराब करेगा। एक नंबर के लालची। अगर हमारे जीवन में लालच की परीक्षा हो, तो हम एक नंबर के लालची निकलेंगे, टॉप पर आएंगे। लेकिन हम हमेशा अपनी लालच को छुपा के सही तरीके से पेश करते हैं कि भाई, यह मेरी जरूरत है, लालच नहीं।

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वीडियो: Live प्रत्यक्ष ज्ञान प्रश्न और उत्तर / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-10-15