प्रश्नोत्तर P5-0181 · भाग 5
गीता कहती है जिससे खतरा हो उसे मारने में पाप नहीं — सत्य है?
आत्मरक्षा में हां। आत्मरक्षा में आप कुछ भी करते हो तो उसमें दोष नहीं लगता है। लेकिन शौक की रक्षा में नहीं। वो तो पाप हो गया। आत्मरक्षा में दोष नहीं लगता है, आप कुछ भी कर दो। शौक की रक्षा में फिर वही बेईमानी हो जाएगी।
हमारी बातें सामाजिक में ही काम आएंगी। उसी में तो आप जी रहे हो। अध्यात्म अलग और समाज अलग नहीं है। हमने अलगाव कर दिया, अलगाव नहीं है। तो ऐसे अगर मान लो, कोई यहां से सांप जाए, तो एक हमारी मान्यता यह है ना कि ये मेरे को काटेगा। नहीं, क्यों काटेगा? वो तो जा रहा है, चला जाएगा। तो यहां से अगर बीच से निकलेगा तो लोग उसको मारेंगे नहीं। अगर वो जा रहा है तो जाने दो, अपनी जगह चला जाएगा। एक जीव दूसरे जीव को तभी काटता है, या तो उसे भूख लगी हो, या तो उसे परेशान किया हो। ऐसे नहीं काटता।
क्योंकि मैं आपको अनुभव बताऊं। मैं नर्मदा तट पर ऐसे सोया रहता था। जैसे ही मैं ऐसे उठूं तो मेरे ऊपर से कोई बड़ा बड़ा जीव ऐसे कूद के चले जाए। उन्होंने मेरे को एक बार भी नुकसान नहीं पहुंचाया। मैं ऐसे झाड़ियों में जाके सोता था, जहां सांप वगैरह रहते हैं। आज तक इन्होंने मुझे कभी भी तकलीफ नहीं पहुंचाई। लेकिन हम तो देखते ही मार देते हैं। जैसे मान लो सांप आ गया, चीता आ गया, शेर आ गया। मतलब वही बात है, ताकतवर है तो हम भाग लेते हैं, और कमजोर है तो हम भगा देते उसको, या मार देते हैं। सुरक्षा में जियो। लेकिन अगर बच सकते हो, जरूरत नहीं है, तो मारने की क्या जरूरत है?
वो अपनी दुनिया में मस्त है, हम अपनी दुनिया में मस्त रहें। आज यहां कुटिया बनी है, कोई जीव कभी परेशान नहीं किया। सब अपने अपने में हैं। इतने महीने से, आप बताइए, पूरा जंगल है, कभी आपको कहीं किसी जीव ने परेशान किया? कोई नहीं किया। आप जी रहे हो, वो जी रहा है। सब तो धरती माता की संतान हैं। जीव तभी आपको काटते हैं, या तो आपने उनको खतरा दिखाया, या तो उन्हें भूख लगी है, भोजन दिखता है, तभी। बस इस स्थिति में वो काटते हैं।
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वीडियो: Live प्रत्यक्ष ज्ञान प्रश्न और उत्तर / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-10-15