प्रश्नोत्तर P5-0199 · भाग 5
ध्यान लगने लगे तो क्या-क्या बदलाव नजर आते हैं?
ध्यान लगने का मतलब देखो। बेचैनी कम होने लगेगी। घुटन कम होने लगेगी। पश्चाताप होने लगेगा। आंखों में आंसू आने लगेंगे। अपनी गलतियों पर पश्चाताप होगा। अब मैं नहीं करूंगा। मैं कैसे निकल जाऊं इस भवसागर से? मैं फंस गया हूं, पूरी तरह। फंसने के लिए मैंने ही कर्म किया है। अगर ध्यान लगने लगेगा, तो ये सब दिखने लगेगा।
जितने भी मेरे साथ दुर्व्यवहार हुए हैं, या मैंने किसी के साथ किए हैं, और मेरे साथ किसी ने किया है, इसका जिम्मेदार मैं हूं। मेरे कर्मों के द्वारा ही मुझे सब कुछ मिला है। तो जब ध्यान घटित होगा आपके जीवन में, तो ये सब दिखने लगेंगे। पश्चाताप होगा, आत्मग्लानि होगी, आंसू आएंगे। आपको अपने कर्मों पर रोना आएगा। अगर किसी को बोल रहे हो कि इसने मेरे साथ गलत किया, तो आप कहोगे, उसने गलत तब किया जब मैंने कभी गलत किया होगा। राग-द्वेष भी नहीं होगा।
आप समझ जाओगे। कर्म के सिद्धांत को समझ जाओगे, कि अगर मेरे साथ कोई कुछ हो रहा है, तो उसका इंतजार मैं ही तो था। मैंने कभी किया था, तभी तो हो रहा है। ध्यान घटित होगा, तो आपको सब मिलाजुला के पश्चाताप होगा। आत्मग्लानि होगी। घुटन होगी। बेचैनी होगी। फिर धीरे-धीरे बेचैनी हटने भी लगेगी। पश्चाताप के आंसू होंगे आपकी आंखों में।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23