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प्रश्नोत्तर P6-0108 · भाग 6

अभी की चर्चा सुनकर भ्रम हो सकता है। क्या यह भ्रम मेरे लिए है, या उनके लिए? आपकी बात अंतिम है, क्या समर्पण कर दें?

भ्रम की स्थिति तुम्हारे लिए हो सकती है। ना इनके लिए है, ना मेरे लिए। मैं तुम्हारे लिए नहीं बता रहा। तुम्हारे लिए हो सकती है, पर ना इनके लिए है ना मेरे लिए। अगर होता तो मैं तोड़ देता। जैसे उनका भ्रम था, उसे मैंने तोड़ा। होता तो तोड़ देता। नहीं तोड़ूंगा तो सामने वाला गिर जाएगा। ना इनके लिए भ्रम है, ना मेरे लिए। होता तो तोड़ देता, जैसे उनका तोड़ दिया। भ्रम को बढ़ावा दूं तो भ्रम बढ़ता ही चला जाएगा। जिम्मेदार वह नहीं होगा, मैं होऊंगा। क्योंकि वह मेरे सानिध्य में है। भ्रम बढ़ा तो आगे बढ़ता रहेगा, और दोष मुझे लगेगा। नहीं तो इतनी देर बात करने की जरूरत क्या थी। भ्रम तोड़ने के लिए इतनी देर बात की। बातों में दम था। भ्रम उन्हीं बातों से टूटा। लोगों के लिए उन बातों का मतलब नहीं भी हो। पर मैं न बोलता तो भ्रम नहीं टूटता। एक जंजीर उसे दिखती नहीं। वह समझती है सबसे मुक्त हो गई। मुक्ति का भ्रम लेकर घूमती रहती। यही भ्रम लेकर जिंदगी निकल जाती। भ्रम रहेगा तो मैं तोड़ दूंगा। नहीं तोड़ा तो उसी में आगे बढ़ता जाएगा। रुकेगा नहीं। जीवात्मा जिधर बढ़ती है, बढ़ती ही जाती है। भ्रम के बाद नया भ्रम। ऐसे नए-नए भ्रम हो जाते हैं। यह ऐसी साधना कर रही है कि मुझे पता चलता है। इसलिए सचेत किया, कहां गिरोगी। उठ तो बहुत तेजी से रही हो। पर गिराने वाले भी आ सकते हैं। सचेत रहना। गिर गईं तो तुम जिम्मेदार होगे। तुम्हारे लिए आदेश आया है कि ऐसी संभावना होगी। सचेत रहना है, क्योंकि बहुत तेजी से आगे बढ़ रही हो। उनके लिए नहीं कहा। मुझे आदेश आया था, मैंने कह दिया। समझ गए। अब यह साफ है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 7 जून 2026 #योगी · 2026-06-07