प्रश्नोत्तर P6-0164 · भाग 6
उम्मीद में हम बाहर गए। निराशा होकर, उम्मीद छोड़कर, अंदर कैसे आएँ? इसका तरीका बताइए। चाय की आदत भी बहुत है।
जरूरत नहीं। तरीका अलग से ढूँढने की जरूरत नहीं।
चाय बहुत पीते हो। यहाँ ऑप्शन क्या है। यहाँ चाय मिलेगी ही नहीं। कपाल पटक दो, तब भी यहाँ की व्यवस्था इधर से उधर होने वाली नहीं। तुम शरण में आए हो। यहाँ नियम यही है। जितनी जरूरत होगी उतना ही मिलेगा। जरूरत से कम पड़े तो हम अपने को उतना रख लेंगे। जरूरत लगेगी, तो तुम नहीं लोगे तब भी दूँगा। मुझे बस इतना देखना है कि जरूरत लग रही है। जरूरत नहीं लगी, तो कपाल पटकते रहो, कोई मतलब नहीं। नहीं दूँगा तो नहीं दूँगा।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: बिना गुरु के नाम जप सफल होगा कि नहीं ? | गुरु के बिना नाम जप ! #livesatsangyogijika · 2025-03-10