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प्रश्नोत्तर P6-0167 · भाग 6

विद्वान कहते हैं, एक करोड़ गाय दान कर दो और एक मछली खा लो, तो दान का फल अलग मिलेगा और मछली का फल अलग। एक दूसरे से कटेगा नहीं। क्या यह ठीक है? फिर सत्कर्म से पुरानी बददुआ की भरपाई कैसे होगी? धंधे में झूठ बोलना पड़ता है, घर वाले सच बोलने पर विरोध करते हैं।

वे सही कहते हैं। पाप और पुण्य की बात अलग है। पाप करोगे तो उसका परिणाम मिलेगा। पुण्य करोगे तो उसका परिणाम मिलेगा। एक करोड़ गाय का दान और एक मछली, दोनों का फल अलग अलग रहेगा। एक दूसरे को काटेगा नहीं। पर मैं सत्कर्म की बात कर रहा हूँ। जरूरतमंद की सेवा। गाय दान किस लिए दिया? सच में जिसे जरूरत थी उसे दिया, या अपने पुण्य और प्रताप के लिए? बात यह है। पुण्य करना और पाप करना, दोनों का फल अलग है। सत्कर्म अनाज की तरह होता है। खाओ या लगाओ। और सत्कर्म ऐसा होता है कि खा भी सकते हो, लगा भी सकते हो। जब तुम सत्कर्म करते हो, किसी जरूरतमंद की जरूरत पूरी करते हो, उस समय तुम उसके लिए कौन होते हो? भगवान। वह भगवान से अपनी जरूरत पूरी करता है, और फिर रोम रोम से आशीर्वाद देता है। क्या वह तुम्हें व्यक्ति समझ रहा है? नहीं। वह तुम्हें भगवान समझ रहा है। परमात्मा से सीधी ऊर्जा आ रही है। उसके रोम रोम से आशीर्वाद मिल रहे हैं। और जब तुम ऐसे सेवा करते हो कि किसी को कहो आज इतने लोगों का भोजन करना है, वह शाम को घर जाकर कहे भोजन मत बनाना, तो क्या रोम रोम से आशीर्वाद देगा? नहीं देगा। निकलेगा ही नहीं। निकालना भी चाहे तो नहीं निकलेगा। जिन लोगों को तुमने लूटा है, वे रोम रोम से बददुआ दे गए हैं। जब जरूरतमंद की सेवा करोगे, तो रोम रोम से आशीर्वाद मिलेगा, और वह भरपाई हो जाएगी। सबकी भरपाई हो जाएगी। सत्कर्म में तुम खर्च भी तो कर रहे हो। धन खर्च करो, तन खर्च करो, अपनी समझ खर्च करो। बिना कुछ दिए सत्कर्म होगा क्या? वह मेहनत से कमा रहे हो। सत्कर्म करके मुक्ति से मोक्ष तक पहुँच सकते हो। ईमानदारी और सत्कर्म। ईमानदारी नहीं की और सत्कर्म कर रहे हो, तो भी कुछ नहीं होगा। भटकते रह जाओगे। ईमानदारी से अर्जित धन से सत्कर्म करना। सत्कर्म जरूरतमंद की सेवा है। उससे भरपाई हो जाएगी। सर्वप्रथम ईमानदार हो जाओ। माल निकले तभी बोलना। माल नहीं निकला तो मत बोलना। ब्लड प्रेशर बढ़ने से बचाने के लिए तुम कितना गिर रहे हो, समझ नहीं पा रहे। बाद में समझ में आएगा। जब उधर लेट होता है, तब गुस्सा आता है, और उस गुस्से में बददुआ देगा। तुम उससे झूठ बोल रहे हो। सच बोलो तो कितना भी गुस्सा हो, बददुआ लगेगी ही नहीं, क्योंकि तुम सच बोल रहे हो। झूठ बोल रहे हो तो उसकी बददुआ फिर लगेगी। इसलिए साफ साफ बोलो। गाड़ी नहीं निकली है तो बोलो, नहीं निकली। कुछ पैसों के लिए झूठ मत बोलो। सामने वाले को तभी समय देना जब पक्का कर सको। नहीं तो मत दो। कठिन नहीं है। नहीं कर सकते तो व्यापार बंद कर दो। व्यापार के लायक नहीं हो तो काहे को कर रहे हो। छोड़ दो। काम को काम के तरीके से करो। कर्म ही पूजा है। अपनी मिलावट कर दी तो वही पतन का कारण बन जाती है। बेटी है, अगले साल शादी कर देनी है, तब काम खत्म करना है। बंद तो करना ही है। पर अब जितने दिन करो, उतने दिन ईमानदारी से करो। करके देखो। एकदम करो। बंद हो तो अपने आप बंद हो जाए। उतना तो कमा ही लिया है। अब ईमानदारी से बोलना शुरू करो, और देखो क्या होता है। भाइयों को बेईमान मत बनाओ। परिवार मिलकर काम कर रहा है। तुम ईमानदारी से बोलो। वही भाइयों को अपना व्यवहार सिखा देगा। वे ले ही लेंगे। तुम बस ईमानदारी करो। अपने आप ले लेंगे, निकाल देंगे। जब तक झूठ बोला तुम थे। अब तुम जाओ। जाओ तो चले आना अपनों की कुटिया में। इस शरीर के द्वारा कोई बोल ही रहा है, कि भोजन और रहने की जितने में जी सको उतना तो है। घर में व्यापार की बात में कभी सच बोलोगे, समझाओगे कि काहे को ऐसा कर रहे हो, तो घर वाले विरोध करेंगे। कोई बात नहीं। विरोध ही सही। कम से कम विरोध तुम्हारा किया जा रहा है। क्या फर्क पड़ता है। यहाँ से जाने के बाद पूरी तरह यही करना है। वाणी अब काम करेगी। रामकृष्ण परमहंस के पास एक महिला बच्चे को लेकर आई। बोली, गुड़ बहुत खाता है, बोल दीजिए। पहले उन्होंने पंद्रह बीस दिन कोशिश की। बीच में औरत को कई बार टाल दिया। फिर जब दोबारा बच्चे को लेकर आई, तब कहा, बेटा गुड़ मत खाना। महिला बोली, यह तो पहले ही बोल सकते थे। वे बोले, पहले नहीं बोल सकता था, क्योंकि पहले मैं खुद गुड़ खाता था। उनकी वाणी काम कर गई। वैसे ही वाणी तब काम करती है, जब कथनी, करनी और रहनी एक हो। अब जाना तो पक्का कर लो। चाहे कुछ भी हो जाए। जितना जीवन बचा है, ईमानदारी से जीऊँगा। फूँक कर चाटना नहीं। कारोबार में कहीं घूस देनी पड़ती है। मत देना। अधिकारी माँगे तो मत देना। जो कुछ होना हो, होने दो। अब तुम छोड़ना चाह रहे हो। लोग तुम्हें छोड़ देंगे। तुम मत छोड़ो। ऐसी ईमानदारी अपनाओ कि तुम ही बचो। अपने भाइयों से कहो, जाओ। जो बेईमानी करने को उतावला है, उसे यह चैनल खुलवा दो। जो घूस माँगे, उससे कहो, भाई यह है, यह चैनल खोलो। वह भी ईमानदार हो जाएगा।

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