प्रश्नोत्तर P7-0018 · भाग 7
बोध के बाद भाव क्या रहता है? पहले तुम और बाद में मैं, क्या यह बोध का लक्षण है? तब प्रेम कैसे होता है?
बोध के बाद, जब बोध में व्यक्ति नहीं रहता, तो उसका भाव यह रहता है। बोध से पहले कहेगा, पहले मैं, बाद में तुम। और बोध होने के बाद कहेगा, पहले तुम, बाद में मैं। बस इतना है। यही है।
बोध नहीं हुआ तो वह कहेगा, पहले मैं, बाद में आप। बोध होने के बाद कहेगा, पहले आप, बाद में मैं। बस यही है। बोध मिट गया। खुद को है ही नहीं। पहले आप। जो है, सब पहले आप। बस यही है।
अगर यह भाव आ गया तो बोध हो गया। बोध हो गया तो यह भाव आ गया। क्या यह लक्षण है उसका। तभी प्रेम है। तभी प्रेम हो पाएगा। एकदम पूरी तरह। हाँ, पूरी तरह। इसके पहले तो बस इसकी झलक दिखाई पड़ती है। यही बोध है, और यही प्रेम है।
वह यह नहीं देखेगा कि तुम कौन हो। कौन उसके जीवन से खत्म हो जाता है। उसके जीवन में कौन है, यह नहीं रहता। कौन तो प्रश्न पैदा करने वाली चीज है। फिर उसमें सापेक्षता आ जाएगी। तुम कौन हो, यह नहीं रहता।
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वीडियो: आध्यात्म को ना जानते हुए ईमानदारी सत्कर्म के साथ क्या आत्मज्ञान संभव है ? #livesatsang · 2025-03-13