आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P7-0057 · भाग 7

दर्शन का अर्थ दोबारा समझाइए।

दर्शन इसलिए करना है कि दर्शन करने से भी मुक्त होना है। और दर्शन मुक्त व्यक्ति का करना है, बंधन वाले का नहीं, क्योंकि वह बाँध देगा। दर्शन भी इसलिए करना है कि दर्शन से मुक्ति हो। और दर्शन उसी का करो जो मुक्त स्थिति में हो।

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वीडियो: आध्यात्म को ना जानते हुए ईमानदारी सत्कर्म के साथ क्या आत्मज्ञान संभव है ? #livesatsang · 2025-03-13