प्रश्नोत्तर P7-0109 · भाग 7
विवेक राठौड़ पूछते हैं, गुरु जी, मैं शिक्षक हूं। तीन चार बार समझाता हूं, फिर भी कुछ बच्चे नहीं समझते। स्कूल में समय सीमित है, जिसमें बच्चों को समझाना होता है। ऐसे में क्या करूं? सरकार और सब रिजल्ट चाहते हैं, सबको सौ प्रतिशत चाहिए।
समझाने का प्रयास करिए, पर समझाना थोपिए मत। सबका बुद्धि स्तर अलग अलग है। अपनी तरफ से जितना कर सकते हो, करिए। बहुत ऐसे बच्चे हैं, जिनकी मन और बुद्धि ऐसी है कि वह नहीं समझ सकते। आप कितना भी प्रयास करो। तो अपना काम ईमानदारी से करिए। बस। आप कहोगे, नहीं, मैं इसे समझा के ही छोड़ूंगा। तब उसमें बहुत बुराइयां आ जाती हैं। नहीं। अपना काम ईमानदारी से करो। बात खत्म। जिसे समझना होगा, वह समझ लेगा। नहीं समझना होगा, तो आप कुछ भी नहीं कर सकते। इतना है कि अपना काम ईमानदारी से करिए।
सरकार रिजल्ट चाहती है। वह सब रिजल्ट चाहते हैं। मैं वही कह रहा हूं। सबकी बुद्धि का स्तर अलग अलग है। कहते हो, सबको सौ प्रतिशत रिजल्ट चाहिए। उन्हें भी पता है कि नहीं आएगा। उन्हें यह बात पता है। पर प्रयास हमारा लाने का रहेगा। जब हम सौ का लक्ष्य रखेंगे, तब जाकर थोड़ा कम आएगा। सबको पता है, पूरा नहीं आएगा। होता भी नहीं है। पर प्रयास तो करेंगे। नहीं तो लोग मेहनत ही नहीं करेंगे। सबको पता है कि पूरा नहीं आएगा।
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वीडियो: भाग्य कौन तय करता हैं प्रारब्ध या कर्म ? Aadhyatmik Pratyasth Gyan Yogi · 2025-07-03