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प्रश्नोत्तर P7-0148 · भाग 7

ईमानदारी की बात तब कठिन हो जाती है, जब स्थिति आती है। मान लो एक सरकारी विभाग है। सिस्टम चलाने के लिए कहीं ना कहीं बेईमानी में शामिल होना पड़ जाता है। परिवार भी चलाना है, आदमी उसी नौकरी पर निर्भर है। सरकार तो तय तनख्वाह दे रही है, पर आदमी सिस्टम के बीच में पिस जाता है। तब क्या करे?

इस्तीफा है। मैं आपको सीधी बात बताता हूं। इसमें ज्यादा समय बर्बाद नहीं करेंगे। आत्मिक कल्याण की बात करो। हमें ईमानदारी से काम करना है, और उतनी सैलरी मुझे मिल रही है। सिस्टम कभी बेईमानी नहीं करता। सिस्टम में बैठने वाले लोग बेईमान होते हैं। अगर बैठने वाला कह रहा है कि बेईमानी करो, तो आप बोलो, हम तो नहीं करेंगे। हमारे पास इस्तीफा है। फिर उस नौकरी पर घर क्यों टिका हो? जितने लोग दुनिया में जी रहे हैं, क्या सबकी सरकारी नौकरी है? तुम्हारी सरकारी नौकरी है, इनकी भी सरकारी है, इनके पिताजी की सरकारी थी, तुम्हारे पिताजी की थी। तब बताओ, तुम्हें कैसे पाल लिया? बेईमानी करोगे, तो उसका परिणाम तुम्हें मिलेगा। तुम्हारे हाथ में इस्तीफा है। बहुत काम है, वह करो। और नहीं, तो बेईमानी का परिणाम तुम्हें भोगना पड़ेगा। उससे कोई बचा नहीं पाएगा। सीधी सी बात है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 12 अप्रैल 2026, अपनों की कुटिया में सत्संग समझो #योगी · 2026-04-12