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प्रश्नोत्तर P7-0151 · भाग 7

दवाई को अंतिम अवस्था तक ले जाने से पहले खरगोश, बंदर जैसे जीवों पर प्रयोग होते हैं, और उनकी मौत बड़ी दर्दनाक होती है। फिर वही दवाई बाजार में आकर हम भी खाते हैं। क्या उसका दोष हमें भी लगता है? यह आधुनिक बात है, शास्त्रों में नहीं मिलती। आदमी करे क्या?

हां, बिल्कुल मैं उस बात को मानता हूं। यह बात सही है कि खरगोश, बंदर, ये सब मारे जाते हैं, और उनकी मौत दर्दनाक होती है। मन को कष्ट होता है कि दवाई मैं भी ले रहा हूं, तो दोष का अंश मुझे भी मिलना चाहिए। कोई बात नहीं। अब मिले तो मिले। अब क्या करोगे? अब जीने के लिए। जैसे किसी जीव को फोड़ा हो जाए, उसमें अनेक कीड़े पड़ जाते हैं। उन कीड़ों को अगर नहीं मारोगे, तो वह फोड़ा ठीक नहीं होगा। एक जीव को बचाने के लिए लाखों जीव मारे जाते हैं। जीते-जागते मारते हैं। फोड़ा हमें भी होता है, जीव-जंतुओं को भी होता है। मारना ही पड़ेगा।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 12 अप्रैल 2026, अपनों की कुटिया में सत्संग समझो #योगी · 2026-04-12