प्रश्नोत्तर P8-0014 · भाग 8
एक साधक पूछता है, पिछले सत्संग सुनकर लगता है कहीं मैं भगोड़ा तो नहीं हूं। माता-पिता अस्सी के ऊपर हैं, पैतृक संपत्ति अभी अपने जिम्मे रखी है, हमें कुछ नहीं दिया। चार भाई हैं, दो बड़े भाइयों को कुछ नहीं दिया, छोटे भाइयों को दिया है। मेरे दो बेटे और एक बेटी हैं, सबसे छोटा पच्चीस पार कर गया, पढ़े-लिखे हैं, बड़े बेटे की नौकरी और शादी हो गई, दो की शादी बाकी है। पत्नी, छोटा बेटा और बेटी कहते हैं जब तक शादी ना हो जाए तब तक मत जाओ। नौ साल कमाई मां को दी। क्या मैं भगोड़ा हूं?
शादी करके निपटा दो। शादी भी करने में कम से कम एक महीना अपने आप को दो। दो महीना अपने आप को दो। पत्नी, छोटा बेटा, बिटिया कहती है जब तक शादी ना हो जाए तब तक मत जाओ। कुछ दिन के लिए चलने को कहो तो नहीं चलते। सत्संग सुनने को कहो तो वीडियो भी नहीं सुनती। चलो, तुम अपना कल्याण करो। उसकी जैसी प्रवृत्ति होगी, उसी में रहेगी ना।
अब छोड़। ज्यादा समय बर्बाद मत कर। क्योंकि लाइव भी लोग सुन रहे हैं। तो तू क्या कर, अपने कल्याण में लग जा। और अपनी जितनी जिम्मेदारी है, दो बच्चों की शादी बची है, उनको पूरा कर। मां-बाप भी कितने दिन के मेहमान हैं। मां-बाप की जिम्मेदारी इसलिए हमारी उतनी नहीं है। उन्होंने तुझे और बड़े भाई को नहीं दिया, छोटे भाइयों को कुछ दिया है। अब तू अपने कल्याण में लग जा। छोड़, जाने दे। उन्होंने किसको दिया, क्या दिया, वो छोड़। तू अपने कल्याण में लग जा।
तुझे लगता है कि मेरी जिम्मेदारी दो बच्चों की तो है ही है। उसको निभा। और उस निभाने में भी आता-जाता रहे। और जब निभा ले तो पूरी तरह आ जा। पत्नी को दे, बोल दे, भैया मैं जा रहा हूं अपने आत्मिक कल्याण के लिए। तू अगर मेरे साथ आई है, अगर मेरे साथ चल रही है तो ठीक है। नहीं तो आज से हम आएंगे या नहीं आएंगे, मुझे नहीं पता। ऐसे बोल के निकल सकता है। पत्नी से एक बार बोलना जरूरी कि मैं जा रहा हूं। बार-बार मत बोल। बार-बार नहीं। दो दिन, चार दिन के लिए चलो मेरे साथ, तो नहीं। कहीं और छोड़। तू अपने कल्याण में लग जा।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 19 अप्रैल 2026, इस वक्त इस दुनिया में सबसे कठिन कार्य क्या है ? #योगी · 2026-04-19