प्रश्नोत्तर P8-0017 · भाग 8
मेरी स्थिति यह है कि एक तरफ घर-संसार है और एक तरफ यह रास्ता। लेन-देन पूरा करने में लगा हूं। रुकावट खुद से आ रही है। दिमाग चालाकियों में उलझ जाता है, खुद से ही वैकल्पिक रास्ते निकाल लेता हूं। दृढ़ मानसिकता नहीं बना पा रहा। आदतें हैं, और आलस्य की तरफ ले जाता है। पक्का है कि यही फाइनल रास्ता है, फिर भी भटकाव होता है। क्या करूं?
अब तो हमारी आदतें हैं क्या? तो कर्म में मत उतारो। बस। कर्म में मत उतारो। अंदर चालाकी आ रही है, आने दो। लेकिन बाहर मत उतारो। अंदर बेईमानी का भाव आ रहा है, आने दो। लेकिन तुम करो मत। वो तो नहीं हो रहा है। तो धीरे-धीरे वो निकल जाएगा। वो भी हट जाएगा।
कहीं ना कहीं एक आलस्य की तरफ ले जाता है। बस तुम करो मत। वो जहां ले जाए, ले जाएगा। तुम करो मत। पक्का ये कन्फर्म भी है कि ये रास्ता है, फाइनल रास्ता। फिर भी वो भटकाव। कोई बात नहीं। भटकने वाला काम मत करो। भटकाव अगर मानसिक हो रहा है तो होने दो, लेकिन तुम कर्म में ना उतारो। प्रतिक्रिया मत दो। आने दो। मानसिक आने दो। क्या फर्क पड़ता है? उसे कर्म में मत उतारो।
तो बस, कर्म में मत उतारो। और ज्यादा से ज्यादा समय, जब भी मिलता है, यहां आओ। आप तो पास में ही हो। ज्यादा दूर नहीं हो। जब भी आपको लगता है कि हमारे पास समय है, चले आओ।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 19 अप्रैल 2026, इस वक्त इस दुनिया में सबसे कठिन कार्य क्या है ? #योगी · 2026-04-19