प्रश्नोत्तर P8-0164 · भाग 8
निरंतर जुड़ने के लिए क्या करें? आत्मज्ञान किससे होता है? चिंतन कैसे करें?
ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग। मूल ईमानदारी है, उसके बाद सत्कर्म है। सत्कर्म आपको पहुंचाएगा सत्य तक, ईमानदारी के साथ। दोनों। अगर मान लो आपने ईमानदारी अपना ली और सत्कर्म नहीं किया, तो भी वहीं रुक जाओगे। पिछला कैसे नाश होगा? और आपने सत्कर्म अपना लिया, लेकिन ईमानदारी नहीं अपनाई, तो भी पतन ही होगा। हर स्थिति में। तो दोनों, ईमानदारी और सत्कर्म, और सत्संग। इसलिए सुनना है कि मैं राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा और कर्ता के भाव से कैसे छुड़ाऊं अपने आप को। यह सत्संग आपकी सहायता करेगा।
बस बैठना है, बस यही भाव से बैठना है कि मुझे अपने आप को निकाल लेना है। वह चिंतन चालू हो जाएगा। देखते रहो उसको। अगर राग-द्वेष बन रहा है, तो क्यों बन रहा है? जाओ उसके अंदर। किसी से उम्मीद है? किसी की याद सता रही है, तो क्यों सता रही है? कोई इच्छा है? कोई अपेक्षा है? कोई उम्मीद है, दिया-लिया है? जाओ गहराई में। क्या मुझे यह चाहिए? क्यों उनकी याद सता रही है? करो प्रश्न अपने आप से। यही चिंतन है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 26 अप्रैल 2026 #योगी · 2026-04-26