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प्रश्नोत्तर P9-0041 · भाग 9

हमने जमीन अपनी मेहनत से ले ली है। मां-बाप, मायका, और जहां डेरा है वहां सब जानते हैं। सिर्फ ससुराल के मां-पापा से मजबूरी में झूठ बोला है, क्योंकि बताने पर बवाल हो जाएगा, इसलिए घर से छिपाया है। बताने की हिम्मत नहीं होती। क्या यह झूठ है?

बोलने की हिम्मत बताकर ही लेनी चाहिए। उसमें क्या है? आपने उनका अधिकार छीनकर तो नहीं लिया है। ऐसा तो नहीं कि उनसे झूठ बोलकर पैसे ऐंठकर लिए हों। अपनी मेहनत से लिए हो। तो जाने दो, छोड़ो। इसमें क्या झूठ है? जरूरत ही नहीं है। जब बवाल करेंगे, अगर आप उनसे छल करके, बेईमानी करके, उनसे कुछ धन ले लो, जैसे रोग का नाटक करके कि मुझे कुछ हो गया, मैं ले लिया, और उससे जमीन खरीदी, तो झूठ होता। आपने अपने बल से, अपनी सामर्थ्य से, अपनी मेहनत से जमीन खरीदी है, तो ठीक है, छोड़ो। इसमें झूठ की बात ही नहीं है। झूठ तब होता है जब हम सामने वाले से कुछ झूठ बोलकर पैसा लेते हैं, और उससे खरीद लेते हैं, और हम बताते नहीं। मैं अपनी मेहनत से ले रहा हूं। मुझे जरूरी थोड़ी न है। जिसे-जिसे लगेगा बताना, मैं उसको बताऊंगा। ऐसे तो पूरी दुनिया को बताना पड़े। पूरी दुनिया को तो नहीं बताना। अब तू उनसे नहीं बताया, बहुत लोगों से नहीं बताया। हम अगर खुद सामर्थ्यवान होकर कार्य कर रहे हैं, अपनी मेहनत के द्वारा, तो मुझे जिसे लगेगा वह चीज बताऊंगा, नहीं बताऊंगा। बता दिया, तो यह झूठ नहीं है। क्लियर हुआ कि नहीं?

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वीडियो: Live के प्रश्न और उत्तर स्वयं के सामर्थ को जांच कर आगे बढ़े । #योगी · 2026-06-05