प्रश्नोत्तर P9-0097 · भाग 9
आपने एक जगह बोला कि किसी भी मार्ग से आत्मज्ञान होने पर एक ही जगह पहुंचते हैं। यह कैसे पता चला आपको, जब हम दूसरे को जान नहीं सकते?
जैसे ब्याह हो जाए, तो सबकी लड़कियां एक ही रास्ते से होती हैं, दूसरे रास्ते से नहीं। कोई बाप बना, मां बना, तो उससे पूछा जाए कि क्या जब मां-बाप बन जाता है, तो सबको एक ही तरीके से बच्चे पैदा होते हैं। हां। अब उसने तो दुनिया में सबको जाकर देखा नहीं। लेकिन उसे इतना अनुभव हो गया कि पिता से शरीर निकला, मां के घर में गया, पला, और उसी तरीके से निकल जाएगा। तरीका तो एक ही होगा। अलग तो नहीं होगा। एक-एक जाकर देख थोड़ी न बांटता है।
चोट लगी, पीड़ा हुई। तो हम कहते हैं न, कि चोट लगी, पीड़ा हुई। अगर एक बार मुझे यह चोट लग गई, पीड़ा हुई, जब दूसरे को लगेगी तो मैं समझ जाऊंगा न कि मेरे जैसी ही पीड़ा हो रही है। बस, कोई सहन कर लेता है। कोई चिल्ला देता है। कोई कम चिल्लाता है। कोई नहीं चिल्लाता। लेकिन दर्द तो हो रहा है न। अब क्या, हमें अंदर घुस के देखना है? हर चीज में घुसा मत करो। नहीं तो घुस जाओगे, तो सामने वाला निकाले न दे। ऐसे चौरासी लाख योनि में भटकते रहोगे। ज्यादा घुसा मत। दिमाग को ऐसे अपने कल्याण में लगाओ, ज्यादा अच्छा होगा। एक बार अंदर घुस गए, न निकले, तो क्या करते रह जाओगे।
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वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06