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प्रश्नोत्तर P9-0123 · भाग 9

आश्रम में जो महाराज आशीर्वाद देने आए, और फिर खर्चा-पानी मांगने लगे। साधु के भेष में भीख मांगना क्या है? साधु किसे कहें?

यहीं पर आश्रम है। तो यह एक कमल आता है न। कमल गए, मेरे साथ था। मैं उस आश्रम में गया था। इस समय बैठा था कुर्सी पर। वह भी बैठा था। कुछ महाराज लोग आए। एकदम गाड़ी से उतरे। धड़ाम से। एकदम त्रिपुंड लगाए। गेरुआ धारण किए। कमल से कहे, जा, आशीर्वाद ले ले। हम कहे, ले ले का। हमें तो मालूम है, इनके पास कुछ न। लेकिन तू ला। तू। दूर का ढोल सुहावन, घर का मूली साग बराबर नहीं। यही बोला। गए, आशीर्वाद ले ले। आए। कहा, चलो भाई, ले तो ले। कुछ। अब आगे देख। हम उनसे न कहे। अपने से। हम कहे, अभी इतनी शुरुआत है। पूरी फिल्म अभी बाकी। बस। अब तू देख। कुछ देर बैठे। आश्रम वाला, वहां के सेवक को बुलाए। जरा किसी बुलाओ। बुलाए। बोले कि हम आगे जा रहे हैं। कुछ खर्चा-पानी। अब हम। हम कहा, देखा। अब के तो खर्चा-पानी। तो बोले, भाई, मेन तो नहीं हैं। खर्चा-पानी हम कैसे दें। तो एक खड़ा था। तो बोले, सौ रुपये, दो सौ ही, कुछ दे दो। तो कोई सौ-दो सौ दिया, मांग के। फिर वह और एक आदमी से मांगे। वह मोटा था। तो उसने कहा, नहीं, हमारे पास कुछ नहीं। अब एक बाबा जी थे। तो वहीं थे। आए थे। वह आगे परिक्रमावासी। सेवा करते थे। तो मैं जब जाता था न, तो मुझे कंबल-वंबल लगा देते थे। खिलाते थे। तो वह मुझे वहीं आश्रम में थे। तो जब वह लोग गए, तो बाबा। वह हमें लेना था। यह चप्पल। मौला। मुझे चप्पल लेना है। आगे जाना है। मेरा चप्पल टूट गया है। तो अब वह बोल रहे हैं। कुछ मोबाइल की भी बात हुई। तो बाबा कह रहे हैं, आप मेरा मोबाइल ले लो। और नहीं, चलो, मैं नया दिलाता हूं। और जिस आदमी ने कहा कि मेरे पास कुछ नहीं, वह आदमी कह रहा है, बाबा जी, चप्पल मेरी तरफ से ले लो। क्या दे। देखिए। चप्पल। ऐसा नहीं, उसके पास पैसा नहीं था। तो उनका सारा भ्रम कमल का चला गया। कि हम भिखारी से गए। आशीर्वाद ले गए। तो ऐसे बहुत। यह भिखारी हैं क्या। अरे यार, तुम समाज का वह कपड़ा का रंग पहने हो, जिसे सर्वश्रेष्ठ की पदवी भी दी गई है। उस भेष को कितने लोग सम्मान के दृष्टिकोण से देखते हैं। और आप जा के घर-घर भीख मांग रहे हो। दो रुपये। यह ऐसे जाकर चिमटा बजा रहे हो। कि बताइए। जिस चिमटे को, जिस ध्वनि को इतना सम्मान दिया गया है। जिस कपड़े को इतना सम्मान दिया गया है। तुम जाकर दुकान पर। यह बताइए। जिस कमंडल को इतना सम्मान दिया गया है। कमंडल में तुम पैसे ले रहे हो। क्या बताइए। यह शर्म की बात है न। कि दे दो। कोई एक दे रहा है। कोई दो दे रहा है। कोई सौ। मतलब एक तरह के तुम भिखारी हो। लेकिन असली रूप में आ जाओ न। फिर पाखंड में क्यों भीख मांग रहे हो। आपको भीख ही मांगना है, तो अपना असली भेष लो, कि मैं भिखारी हूं। अब आप साधु का भेष क्यों लिए हो। जब भीख मांगना है, तो साधु का भेष क्यों लिए। अगर आपको दुकान-दुकान जाकर पैसे मांगना है, घर जाकर पैसे मांगना है, तो फिर साधु का भेष क्यों लिए। अरे, साधु का मतलब है, आकाशवृत्ति से जितना मिल जाए, उसको ग्रहण करते हुए, साधना में लगा रहना। स से साधु। धू से धूल। अगर निर्विकार कराने का कोई भाव बना लिया, तो वह साधु है। चाहे घर में हो, चाहे बाहर हो। हम कहे, ले ले आशीर्वाद। बाद में पछताना। पछताने लगा। यही हालत है।

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वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06