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प्रश्नोत्तर P9-0158 · भाग 9

कुछ गुरु सत्संग के समय बीच में चाय, कॉफी या दूध लेते हैं। आप सात घंटे के सत्संग में भी पानी तक लेने को समय की बर्बादी समझते हैं। क्या आत्मज्ञान के बाद भी शरीर को इतना कष्ट देना चाहिए?

नहीं। मैं अपने लिए नहीं देता। मेरा भाव यह रहता है कि अगर मैं कुछ देर जल ग्रहण करूंगा तो उतना समय, जितने लोग मेरे पास बैठे हैं, यह जीवन में मिले, चाहे न मिले, मुझे नहीं पता है। कभी मिलेंगे, कभी नहीं मिलेंगे। उतना समय मैं अपने शरीर को न दूं। इनके लिए दूं, क्योंकि मैं इनके लिए बैठा हूं। तो चाहे एक घंटा हो, चाहे दो घंटा। मेरा प्रयास यही रहता है कि मैं पूरी तरह समय, जिन लोगों के लिए मैं बैठा हूं, उनको मैं दूं। इसलिए मैं जल वगैरह ग्रहण नहीं करता। और अभी वह शरीर काम कर रहा है। एक दिन शरीर नहीं काम करेगा तो मैं भी क्या करूंगा। लेकिन मैं नहीं चाहता मेरे पास कोई आए और उसका समय बर्बाद हो। मेरे द्वारा मैं ऐसा कभी नहीं चाहूंगा।

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वीडियो: लाइव सत्संग अपनों की कुटिया में प्रश्न और उत्तर #योगी · 2026-07-16