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प्रश्नोत्तर P9-0183 · भाग 9

नेपाल में मेरा चित्त बहुत जाता है, पर मन इधर ही है, क्योंकि यहां बैठने से आत्मसमझ बढ़ रही है। नेपाल की याद आती है। वहां जाकर मुक्त होकर इधर आकर बैठूं, या वहीं रहकर रोज उसका सामना करूं, कौन अच्छा है? दोनों तरफ खिंचाव है, विचार बहुत आते हैं, तबीयत भी खराब होती है, फिर भी लगता है समझ बढ़ रही है।

नेपाल की याद नहीं आती। नेपाल के लोगों की याद आती है। कुछ जगह की, जहां आप जिए होंगे, कुछ लोगों के साथ जिए होंगे, उनकी यादें आती हैं। ऐसे ही लोगों को याद नहीं आती। जिसमें आपका उद्धार हो, वह करो। जिसमें आपका कल्याण हो, वह करो। यहां हो रहा है तो बात खत्म। कहीं भी रहो। हो रहा है तो बात खत्म होनी चाहिए। तुम्हें भूख लगी है। मूल आपको भूख मिटानी है। पकवान का चक्कर है तो बात अलग है। हो सकता है वहां पकवान मिल रहा हो, यहां नमक-रोटी मिल रही हो। मैं जहां हूं, अगर हो रहा है तो मैं दूसरी जगह क्यों जाऊं। पता नहीं वहां हो भी या नहीं। यह फैसला ले लो। दूर का ढोल सुहावना लगता है। अब देख ले क्या करना है। लगे रहो। कैसे भी अपना कल्याण कर लो।

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वीडियो: लाइव सत्संग अपनों की कुटिया में प्रश्न और उत्तर #योगी · 2026-07-16