आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रवचन PV01-0001 · भाग 1

आत्मज्ञान क्यों नहीं हो रहा? — मान की इच्छा और अहम भाव

11 सितंबर 2026 · देख ले आत्मज्ञान हुआ क्यों नहीं ? #योगी

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

मुख्य बातें

रुकावट कहां है?

देखो, ध्यान से समझना इस बात को। अगर मुझे आत्मज्ञान नहीं हो रहा है तो इसका मतलब कहीं न कहीं रुकावट है। अब मुझे देखना है कि क्यों नहीं हो रहा है और वो रुकावट कहां है। क्योंकि आत्मज्ञान की यात्रा में सिर्फ आप अकेले हो — इसमें दूसरा कोई है ही नहीं। दूसरा कोई तो बस मार्ग बता रहा है, तो आप उस मार्ग को समझ के धारण करिए।

अब लग रहा है कि मुझे आत्मज्ञान नहीं हो रहा है, तो मुझे यह देखना है कि क्यों नहीं हो रहा। तो आप पाओगे कि कहीं न कहीं मेरा अहम भाव है — ईगो है। अहम भाव ऐसे ही नहीं उड़ता; अहम भाव है तो इसका मतलब किसी चीज का लालच है।

अपने आप से पूछो

किसका लालच हो सकता है? क्या मैं किसी शरीर में फंसा हूं? ये मुझे देखना है। किसी की याद आ रही है? क्या वो याद मुझे सताती है, बेचैन करती है? याद तो आती है, क्योंकि उन्होंने मेरे लिए कुछ किया था, मैंने भी उनके लिए कुछ किया था — मानवता की वजह से याद आती है। लेकिन अगर याद सताती है तो इसका मतलब मोह है।

क्या मिलने की इच्छा होती है? मैं तो एक लक्ष्य लेकर चल रहा हूं, मैं तो सब कुछ छोड़ने के लिए चल दिया हूं। जब मैं अपने लक्ष्य पर खुद नहीं पहुंच पाया तो उनसे मिलकर उन्हें क्या दूंगा? कहीं मोह है, आसक्ति है? नहीं — तो मुझे अपने लक्ष्य की तरफ आगे निकल जाना है।

मान की इच्छा से अहम भाव

जब मेरी कोई कामना नहीं, कोई इच्छा नहीं, तो विपरीत परिस्थिति में मेरा अहम भाव क्यों उठता है? क्या मैंने सामने वाले से इच्छा रख ली थी कि वो मुझसे शालीनता से बात करेगा? सबका बात करने की अपनी-अपनी शैली होती है। मैंने कुछ कहा, उसने अपनी स्थिति से जवाब दे दिया, तो मैं बेचैन क्यों हो रहा हूं? इसका मतलब मान की इच्छा है।

मान के लालच की वजह से अहम भाव खड़ा हो जाता है। तो इसका मतलब मुझे अभी मुझसे ही मोह है। अनेक रूप-पिंड से तो मैंने अपने आप को छुड़ा लिया, लेकिन इस पिंड से मुझे मोह है, लालच है। और ये मोह नहीं गया तो आत्मज्ञान नहीं होगा।

प्रतिक्रिया मत दो

अब ध्यान रखने की विशेष बात है कि कोई भी स्थिति-परिस्थिति आ जाए, अहम भाव आएगा, लेकिन मैं उसे बाहर नहीं निकालूंगा — चेहरे तक भी नहीं लाऊंगा। ऐसा नहीं कि मुंह से नहीं बोला लेकिन चेहरे से दे दिया और पूरा माहौल खराब कर दिया। किसी भी इंद्रिय से जवाब नहीं देना है। मुझे इज्जत पाने की इच्छा छोड़नी है।

99 पे जाके गिरना

आखिर में, सब कुछ छोड़ने के बाद, हर जगह से छूटने के बाद, मान की इच्छा रह जाती है। और मान की इच्छा से मुक्त नहीं होगे तो फिर आप वहीं चले जाओगे। पहले तो आपके मान को सब ठोकर देंगे; तब कोई पोषण देने वाला मिल जाएगा, बिना मतलब का आपको सम्मान देगा, इज्जत देगा, और आप उसके मोह में ग्रसित हो जाओगे। जहां से चले थे वहीं गिर जाओगे — पक्का गिर जाओगे। हर बार 99 पे जाके ऐसे गिर जाते हैं।

हमारी गलती क्या है? हम प्रश्न करते हैं, पर उत्तर अपने तरीके से पाना चाहते हैं — कि सरलता से बोलो। उसको जैसे बोलना है, उसकी स्वतंत्रता है; वो जैसा जिया है वैसा बोलेगा। आपको अपने उत्तर से मतलब है या उसकी सरलता से? हम सबको सरल बनाना चाहते हैं, तो जब कोई विरोध में खड़ा होता है तो उसके प्रति द्वेष हो जाता है।

काम का परिणाम देखो, स्वभाव नहीं

आप जब भी कर्म कर रहे हो तो काम का परिणाम देखो, न कि लोगों का स्वभाव। अगर आपने लोगों का स्वभाव देखा तो आप फंस जाओगे — फिर आसक्ति हो जाएगी, फिर बंधन हो जाएगा। सामने वाला किस टोन में बोल रहा है, उससे आपको क्या मतलब? वो क्या बोल रहा है, उससे मतलब है।

जब तक लक्ष्य पर न पहुंचो, तब तक किसी को समझाने का प्रयास मत करो, क्योंकि आप तो समझने के लिए निकले हो। जिसके लिए निकले हो वो न हो जाए, तब तक व्यक्तिगत किसी के स्वभाव के बारे में बात नहीं करनी।

क्या नहीं करना है — पहले वो देखो

इससे कैसे छूटें? आपको यह नहीं देखना है कि मुझे क्या-क्या करना है; पहले यह देखना है कि क्या-क्या नहीं करना है। यह हर वक्त अपने आपको सचेत रखना पड़ेगा। फिर जिस लिए निकले हो वो करो। किसी को बदलने का प्रयास मत करो, बस अपना काम करो। काम का परिणाम चाहे बिगड़े चाहे बने — बिगाड़ने वाले को उसका परिणाम मिलेगा।

मुझे ईमानदारी से कार्य करना है। कोई भी कार्य मिल जाए, मेरे पास जितना बल है उस बल को लगाकर काम करना है। व्यक्ति विशेष के चक्कर में फंसे तो गए; मुझे तो बस अपने आप को निकालने के लिए काम करना है।

ईगो खड़ा हुआ तो इसका मतलब मान खड़ा हुआ — पहले मान, बाद में ईगो, ये ध्यान रखना। मान मतलब मैं अपने आप को सिद्ध करना चाहता हूं कि मैं सही और तुम गलत। यहां सब अपनी स्थिति अनुसार कार्य कर रहे हैं, मुझसे क्या मतलब। इस बात को बारीकी से समझ के अपने आप को निकाल लो, और हर क्षण सचेत रहना।