प्रवचन PV01-0003 · भाग 1
सब नोट हो रहा है — बोलने से पहले अपनी योग्यता जांचो
20 अगस्त 2026 · इस बात को बहुत अच्छी तरह समझ लो #योगी
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मुख्य बातें
- यहां सब नोट हो रहा है — एक-एक शब्द का हिसाब देना पड़ेगा।
- आप डिलीट कर दो, सिस्टम में नोट है; जिस दिन इंक्वायरी होगी, सब सामने रख दिया जाएगा।
- कभी आवेश में मुंह से निकल जाए तो वहीं खत्म कर दो; एक बार सेंड हुआ और सामने वाले ने स्वीकार किया तो नोट हो गया।
- पहला काम है अपनी योग्यता को जांचना, फिर बोलना — बोलने के बाद मत जांचो।
- मान के चक्कर में, बड़प्पन में बोल बैठते हैं कि लोग सोचें मैं कुछ हूं।
जैसे बिजली का मीटर
यहां सब नोट हो रहा है, और एक-एक शब्द का हिसाब देना पड़ेगा। जैसे आप बिजली जला रहे हो, मीटर में जितना आता है उतना देना पड़ता है। अब तुम कहो कि इस बार तो बाथरूम में जलाई ही नहीं — उससे मतलब नहीं है; कितनी यूनिट जली है, वो बताएगा। डाटा यूज करते हो — तुम बोलो कि वीडियो तो अपने आप चल गया था, मैंने देखा नहीं — उससे मतलब नहीं है, तूने यूज किया, डाटा का पैसा दे।
क्या तुम्हें लगता है कि ये मोबाइल तुम्हारे द्वारा चल रहा है? आप सिर्फ ऑपरेट कर रहे हो; वो जब चाहे तब कनेक्शन काट दे। सिस्टम में पूछो, तुरंत बता देगा कि आज तुमने कहां कितना यूज किया, क्या देख रहे हो।
डिलीट नहीं होता
तुम मैसेज को डिलीट भी कर दो, वो बता देगा कि तुमने क्या लिख के दिया। तुम्हें लगता है कि मैंने लिखा और डिलीट मार दिया — तेरे लिए डिलीट हुआ, लेकिन जैसे ही तूने कुछ लिखा, सिस्टम में नोट हो गया। एक तेरे यहां नोट हुआ, एक सिस्टम में। जिस दिन फंसेगा, इंक्वायरी होगी, सारा मैसेज तेरे सामने रख दिया जाएगा।
आप कुछ भी बोलते हो, नोट होता है। हमें लगता है — बोला, चलो नहीं करेंगे। नहीं, नोट हो चुका है; अब कारण बता कि तूने क्यों नहीं किया, समय क्यों बर्बाद किया। ये हिसाब हम-तुम नहीं करेंगे, ये कोई और बैठा है। इसलिए तो लोग कहते हैं कि हमने इस जन्म में कुछ नहीं किया, फिर भी भोग रहे हैं। अरे, तूने क्या-क्या किया, सब नोट है।
दिखने में सज्जन
आप भी कहते हो — बड़ा शरीफ आदमी था, बड़ा संस्कारी था। उसने सब डिलीट कर दिया है, तुम्हें दिख नहीं रहा है; यहां तक कि वो खुद भी भूल गया कि क्या लिखा था। एक महीने में WhatsApp पे आपने क्या-क्या मैसेज किए, आपको याद है? नहीं — लेकिन वो सिस्टम में है। रिसेट मार दो, कहो हम फ्री हो गए — ऐसे हम डिलीट करते हैं, होता नहीं है।
सबको लग रहा है कि ये तो एकदम सज्जन है, साफ-सुथरा है; लेकिन इसने बहुत कुछ किया और डिलीट मार दिया। तुम्हें दिख नहीं रहा, पर हिसाब-किताब कहीं और से हो रहा है। इस बात को बहुत अच्छी तरह समझ लो।
वहीं खत्म कर दो
इसलिए कुछ भी मत लिखो — एक बार लिख के सेंड किया तो डिलीट नहीं होगा। कभी लिखने का भाव हो भी, तो सेंड मत करो, वहीं मिटा दो। अगर कभी मुंह से निकल जाए — आवेश में, जज्बात में, उतावलेपन में — तो वहीं खत्म कर दो कि गलती से निकल गया। लेकिन एक बार सेंड किया और सामने वाले ने स्वीकार किया, तो नोट हो गया।
पहले जांचो, फिर बोलो
कुछ करने से पहले सोच लो कि मैं क्या कर रहा हूं, क्यों कर रहा हूं, किस कारणवश बोल रहा हूं। क्या जितना बोलूंगा उतना मैं कर सकता हूं? या तो बोलने से पहले ही मैं करने लायक बन जाऊं, तब बोलूं। बोल भी रहा हूं और फिर कह रहा हूं कि जांच रहा हूं कि कर पाऊंगा कि नहीं — तो बोला क्यों? पहला काम है अपनी योग्यता को जांचना, फिर बोलना।
बोलने की जरूरत क्यों पड़ गई? मान के चक्कर में बोल बैठा। क्या सामने वाले ने जबरदस्ती की? तब सामने वाला दोषी होगा। या बड़प्पन में बोल बैठा कि लोग सोचें मैं कुछ हूं? तो पहले पूरी तरह जांच लो और फिर करने के लिए बोलो — बोलने के बाद मत जांचो।