प्रश्नोत्तर P1-0045 · भाग 1
गुरु जी, राग-द्वेष बहुत परेशान करते हैं। इनसे मुक्ति कैसे मिले?
इनसे मुक्ति तब मिलेगी, जब आप योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग करोगे। जितनी आपकी सामर्थ्य है, उसमें जीने की शुरुआत करो। और अगर आपको कुछ और चाहिए और आपकी सामर्थ्य नहीं है, तो सामर्थ्य बढ़ाओ और आगे बढ़ो। राग-द्वेष नहीं होगा।
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