आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P1-0048 · भाग 1

योगी जी, आपकी मेहनत रंग ला रही है।

एकदम, मेहनत रंग लाती है। अगर आप किसी भी फील्ड में सामर्थ्यवान होकर कार्य करते हैं, तो आपकी मेहनत रंग लाएगी ही लाएगी, क्योंकि पहुंचाने का पूरा तरीका आपके पास है। इसलिए मैंने 12 साल घोर तपस्या की — घोर ही बोल सकता हूं, कल्पना से भी परे, जिस स्थिति में मैंने जिया है। मैं एक तरह का पागल ही हो गया था — प्रत्यक्ष ज्ञान को प्राप्त करना, उस स्थिति में पहुंचना कि कुछ न होने के बाद भी व्यक्ति आनंद में रहता है, वह क्या है? और वह मेरे पास ही है तो मैं उससे कैसे वंचित हूं? मैं महात्माओं को देखता था, जिनकी उपलब्धि हुई थी; उनका इतिहास पढ़ता था। मैं यही कहता था कि मुझे कब यह प्राप्त होगा? क्योंकि जब तक यह प्राप्त नहीं होगा, कोई मतलब नहीं है — चाहे रिद्धि हो, सिद्धि हो, नाम हो, शोहरत हो, पैसा हो — जीवन में उसका कोई सार नहीं है। मैंने कहा, मेरे जीवन में कुछ भी हो जाए, पर यह पक्का होगा। इसके लिए मैंने अथाह मेहनत की, अथाह संघर्ष किया — अथाह मतलब जिसका कोई अंत नहीं। मैंने कहा, जब मैं पूरी तरह सामर्थ्यवान बन जाऊंगा तब काम करूंगा। क्योंकि जब किसी भी फील्ड में आपको 101% आता है, तो आप बहुत लोगों को सिखा पाओगे और वे सीख पाएंगे। आधा-अधूरा ज्ञान है तो उन्हें क्या सिखाओगे? वे कहीं न कहीं आकर रुक जाएंगे, क्योंकि तुम्हें ही लक्ष्य तक पहुंचने का पूरा रास्ता मालूम नहीं है।

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