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प्रश्नोत्तर P1-0050 · भाग 1

योगी जी, सभी लोगों से लगाव छूट रहा है; केवल आपका सत्संग सुनने और आपके साथ रहने की इच्छा रहती है। यह क्यों हो रहा है? लेकिन मुझ पर तीन बेटियों की जिम्मेदारी है। क्या करूं?

कोई बात नहीं, जिम्मेदारी निभाओ। साल में एक महीना (कुटिया में) रहो, और जब जिम्मेदारी निभा लो तो पूरी तरह अपनों की कुटिया में आ जाओ। आपको मेरे साथ रहने की इच्छा इसलिए हो रही है कि आप अपने साथ होना चाहते हो। सत्संग सुनने की इच्छा इसलिए हो रही है कि यह सत्संग आपको आपसे मिलाने का प्रयास कर रहा है, आपको सहायक हो रहा है। इसके द्वारा आप उस परम स्थिति को उपलब्ध होना चाहते हो। आपको अपना साथ समझ में आ रहा है, तो ठीक है। आप अपना कर्तव्य, अपनी जिम्मेदारी निभाओ, लेकिन जैसे ही जिम्मेदारी निभ जाए, पूरी तरह निकल लो। हां, साल में एक महीना तो पक्का दो — अपनों की कुटिया में आओ, एकांत में रहो, साधना करो, तपस्या करो, कुछ भी हो जाए। तभी आप पूरी जिम्मेदारी निभाकर निकल सकते हो। अगर सोचो कि एक ही बार 60 साल में आऊंगा, तो 60 साल में रोगी बनकर घूमोगे, कुछ होगा नहीं, शरीर जर्जर हो जाएगा।

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वीडियो: 21 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-14