आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P1-0064 · भाग 1

क्या आत्मिक चिंतन में बैठना जरूरी है?

एकदम जरूरी है, बैठना ही जरूरी है, कंपलसरी है। नहीं तो ऐसे ही पूछते-पूछते, बोलते-बोलते जीवन हाथ से चला जाएगा। जरूरी नहीं होता तो लोग एकांतवास में क्यों जाते? जितने भी महापुरुष हुए, एकांतवास में गए, तभी तो अपने आप को समझ पाए, अपने आप को निकाल पाए। पहले समझना है, फिर एकांतवास में जाकर चिंतन करना है कि मैं अपने आप को इस भवसागर से कैसे निकालूं, फिर उसके बाद काम करना है। तो सब जरूरी है।

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